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पांडवों ने बनवाया था केदारनाथ मंदिर? जानें क्या है इसके पीछे का रहस्य

myjyotish expert Updated 17 May 2021 05:37 PM IST
पांडवों ने बनवाया था केदारनाथ मंदिर? जानें क्या है इसके पीछे का रहस्य
पांडवों ने बनवाया था केदारनाथ मंदिर? जानें क्या है इसके पीछे का रहस्य - फोटो : google
केदारनाथ मंदिर शिव का निवास स्थान बताया गया है ∣ जो हिन्दू  पुराणों में साल के करीब 6 महीने हिम से ढका रहता है ∣   बता दें कि केदारनाथ को शिव के 12 बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक माना गया है ∣

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वर्तमान समय में अगर हम केदारनाथ की ओर रूख करे तो पाएगें की विश्व प्रसिद्ध भगवान केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) के कपाट विधि विधान और पूजा अर्चना के बाद आज सुबह 5 बजे खोल दिए गए हैं कोरोना वायरस का असर मंदिर में भी साफ तौर पर देखा जा रहा है ∣  इस वायरस के चलते ये दूसरी बार है कि जब कपाट खुलने पर बाबा के दरबार में भक्तों की भीड़ नहीं थी  ∣  हिन्दू पुराणों में साल के करीब 6 महीने हिम से ढके रहने वाले इस पवित्र धाम को भगवान शिव (Lord Shiva) का निवास स्थान बताया जाता है    ऐसा माना जाता है  ∣   कि यहां भगवान शिव त्रिकोण शिवलिंग के रूप में हर समय विराजमान रहते हैं   ∣

वैसे तो   पौराणिक कथाओं में  केदारनाथ के सम्बन्ध में अनेक कथाएँ प्रचलित है ∣   किन्तु आज हम आपको महाभारत में इस धाम से जुड़ी एक कथा के बारे में बताने जा रहे हैं  ∣
इस कथा में ये बताया गया है कि यहां पांडवों को भगवान शिव ने साक्षात् दर्शन दिए थे, जिसके बाद पांडवों ने यहां इस धाम को स्थापित किया ∣ 
क्यों बनवाया था पांडवों ने केदारनाथ मंदिर ? 


 धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, जब महाभारत के युद्ध में पांच पाण्डवों की विजय हुई तो उसमें सबसे बड़े भाई धर्मराज युधिष्ठिर को हस्तिनापुर का नरेश बना दिया गया  ∣   जिसके पश्चात करीब चार
दशकों तक युधिष्ठिर ने हस्तिनापुर पर राज्य किया किन्तु इस बीच एक दिन पांचों पाण्डवों को श्री कृष्ण मिले जिनसे पाण्डवों ने कहा कि हम सभी भाईयों पर ब्रम्ह हत्या और साथ ही अपने  भाई बंधुओं को  मारने   का कलंक है ∣

इस कलंक को कैसे दूर किया जा सकता है? तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है ∣ ये तो सच है ∣ भले ही इस युद्ध में तुम भाईयों को जीत हुई हो किन्तु इस युद्ध में तुमने अपने भाई बंधुओं और गुरू को मारा है ∣  जिसके कारण तुम सभी भाई पाप के भागी बन गए हो  इन पाप से मुक्ति मिलना संभव नहीं है  ∣  फिर भी अगर तुम इसे मुक्ति चाहते हैं तो ये काम केवल देवों के देव महादेव ही कर सकते हैं तुम भाईयों को भगवान शिव की शरण में जाना चाहिए तत्पश्चात श्री कृष्ण द्वारका लौट आए  ∣

उसके बाद पांडव पापों से मुक्ति के लिए चिंतित रहने लगे और मन ही मन ये सोचने लगे की ये राज पाठ को छोड़कर कब भगवान शिव की शरण में जाए तब ही इन्हें खबर मिली श्री कृष्ण ने अपनी देह त्याग दिया और वो  अपने परमधाम लौट गए हैं  ∣   ये सुनकर पाण्डवों ने धरती पर न रहने का निर्णय लिया 
क्योंकि उनके गुरु ,पितामह, और सखा सभी तो युद्ध भूमि में पीछे छुट गए माता, ज्येष्ठ, पिता और काका विदुर भी वनगमन कर चुके थे. सदा के सहायक कृष्ण भी नहीं रहे थे  ∣   ऐसे में पांडवों ने राज्य परीक्षित को सौंप दिया और द्रौपदी समेत हस्तिनापुर छोड़कर भगवान शिव की तलाश में निकल पड़े  ∣

हस्तिनापुर से निकलने के बाद पांचों भाई और द्रौपदी भगवान शिव के दर्शन के लिए सबसे पहले काशी पहुंचे, पर भोलेनाथ वहां नहीं मिले   ∣  उसके बाद उन लोगों ने कई और जगहों पर भगवान शिव को खोजने का प्रयास किया लेकिन जहां कहीं भी ये लोग जाते शिव जी वहां से चले जाते  ∣  इस क्रम में पांचों पांडव और द्रौपदी एक दिन शिव जी को खोजते हुए हिमालय तक आ पहुंचे   ∣

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यहां पर भी शिवजी ने इन लोगों को देखा तो वो छिप गए  लेकिन यहां पर युधिष्ठिर ने भगवान शिव को छिपते हुए देख लिया था   ∣ युधिष्ठिर ने भगवान शिव से कहा कि हे प्रभु आप कितना भी छिप जाएं लेकिन हम आपके दर्शन किए बिना यहां से नहीं जाएंगे और मैं ये भी जनता हूं कि आप इसलिए छिप रहे हैं क्योंकि हमने पाप किया है ∣   युधिष्ठिर के इतना कहने के बाद पांचों पांडव आगे बढ़ने लगे. उसी समय एक बैल उन पर झपट पड़ा. ये देख भीम उससे लड़ने लगे   ∣  इसी बीच बैल ने अपना सिर चट्टानों के बीच छुपा लिया जिसके बाद भीम उसकी पुंछ पकड़कर खींचने लगे तो बैल का धड़ सिर से अलग हो गया और उस बैल का धड़ शिवलिंग में बदल गया और कुछ समय के बाद शिवलिंग से भगवान शिव प्रकट हुए. शिव ने पंड़ावों के पाप क्षमा कर दिए   ∣

आज भी इस घटना के प्रमाण केदारनाथ में दिखने को मिलता है, जहां शिवलिंग बैल के कुल्हे के रूप में मौजूद है ∣ भगवान शिव को अपने सामने साक्षात देखकर पांडवों ने उन्हें प्रणाम किया और उसके बाद भगवान शिव ने पांडवों को स्वर्ग का मार्ग बताया और फिर अंतर्ध्यान हो गए  ∣   उसके बाद पांडवों ने उस शिवलिंग की पूजा-अर्चना की और आज वही शिवलिंग केदारनाथ धाम के नाम से जाना जाता है ∣ यहां पांडवों को स्वर्ग जाने का रास्ता स्वयं शिव जी ने दिखाया था इसलिए हिन्दू धर्म में केदार स्थल को मुक्ति स्थल मन जाता है ∣ और ऐसी मान्यता है ∣ कि अगर कोई केदार दर्शन का संकल्प लेकर निकले और उसकी मृत्यु हो जाए तो उस जीव को दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता है ∣

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