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शनिदेव की वक्री चाल का साढ़े साती और ढैय्या से प्रभावित राशियों पर क्या होगा असर, जानिए

Myjyotish expert Updated 22 May 2021 10:07 AM IST
know the effect of shanidev on zodiac sign
know the effect of shanidev on zodiac sign - फोटो : google
ज्योतिष में शनिदेव को न्याय के देवता के साथ-साथ पापी ग्रह भी कहा जाता है। शनिदेव के अशुभ प्रभावों से हर कोई अपने आप को सुरक्षित करना चाहता हैं। इन दिनों शनिदेव मकर राशि में विराजमान है और 23 मई 2021 से शनिदेव अपनी वक्री चाल या उल्टी चाल के साथ मकर राशि में विराजमान रहेंगे। शनिदेव पूरें 141 दिन वक्री गति को प्राप्त रहेंगे। शनिदेव की उल्टी चाल से सभी राशियां प्रभावित होगी लेकिन कुछ राशियों पर शनिदेव का अशुभ प्रभाव पड़ने जा रहा है। धनु, मकर और कुंभ राशि में शनिदेव की साढ़े साती चल रही है साथ-साथ मिथुन और तुला राशि के लोगों पर शनिदेव की ढैय्या चल रही हैं। शनिदेव की उल्टी चाल या वक्री होने से इन राशियों पर क्या असर पड़ेगा आईए जानते है-

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 धनु राशि :-
धनु राशि में शनिदेव के साढ़े साति का अंतिम चरण चल रहा हैं। शनिदेव के उल्टी चाल के साथ इन लोगों के काम में बाधा आएंगी, समस्याएं बढ़ सकती है। 29 अप्रैल 2022 तक शनिदेव मकर राशि में रहेंगे। इसके बाद शनिदेव कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे, कुंभ राशि में प्रवेश करने से धनु राशि वाले लोग साढ़े साती से मुक्त हो जाएंगे।

मकर राशि :-
मकर राशि के लोगों पर साढ़े साती चल रही है और शनिदेव की उल्टी चाल चलने से इन लोगों को सेहत और धन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

कुंभ राशि :-
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिदेव के साढ़े साति का पहला चरण शुरु होने वाला है। शनिदेव के वक्री होने पर कुंभ राशि के लोगों के व्यर्थ के खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है। अचानक से ऐसा खर्च हो सकता है जिसका कोई रिर्टन ना हो। इसलिए धन संबंधी काम में ज्यादा ध्यान दें।

मिथुन राशि :-
मिथुन राशि के लोगों पर शनिदेव की ढैय्या चल रही है। मिथुन राशि के आठवें भाव में शनिदेव मकर राशि के होकर विराजमान है। आठवां भाव मृत्यु, कष्ट और स्वास्थ का भाव होता है। आठवें भाव में चलने वाली ढैय्या मिथुन राशि के लोगों को चोट, दुर्घटना या अस्पताल पहुंचा सकती है। इन राशि के लोग स्वास्थ का विशेष ध्यान रखें।

 तुला राशि :-
तुला राशि के लोगों पर भी शनिदेव की ढैय्या चल रही हैं। तुला के चौथे भाव में शनिदेव विराजमान है। चौथे भाव में जब-जब शनिदेव आते है तब-तब ढैय्या का चरण चालू रहता है। शनिदेव की उल्टी चाल होने के कारण इन पर भी उल्टा प्रभाव पड़ेगा। मन का सुख नहीं मिलेगा। जमीन, प्लाट या फ्लैट संबंधित काम बिगड़ सकता है। दुर्घटना होने की संभावना है। स्वास्थ और धन का ध्यान रखें।
 
अगर शनिदेव आपकी जन्मपत्रिका में अच्छे और लाभकारी होकर बैठते हैं तो आपके आने वाली साढ़े साती और ढैय्या में वो शुभ और अच्छे फल प्रचान करते है। अगर जन्मपत्रिका के अंदर शनिदेव बुरे ,हानिकारक, किसी शत्रु राशि में बैठे है या किसी ऐसी जगह बैठे है जहां शत्रु ग्रह और शुभ फल देने वाले ग्रहों की दृष्टि नहीं है तो ऐसे में शनिदेव साढ़े साती और ढैय्या के समय विपरित प्रणाम प्रदान करते है।

ज्योतिष के अनुसार अगर साढ़े साती और ढैय्या का परिणाम कैसा होगा यह जाना जाए तो सबसे पहले आपको यह जानना चाहिए जन्मपत्रिका में आपकी राशि के अंदर शनिदेव शुभ या अशुभ हो विराजमान है और शनिदेव की स्थिति क्या है?
शनिदेव से कभी भी डरने की जरूरत नहीं है आप सही उपाय करवाने से इनके अशुभ प्रभाव को कम कर सकते है।
 


 

 
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