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Home ›   Blogs Hindi ›   Know how Rahu and Ketu were formed? The story is related to the Samundra manthan

Rahu and Ketu birth story: जानें कैसे बने थे राहु और केतु? समुद्र मंथन से जुड़ी है कथा

Nisha Thapaनिशा थापा Updated 20 Jun 2024 01:34 PM IST
राहु और केतु कैसे बने
राहु और केतु कैसे बने - फोटो : My Jyotish

खास बातें

Rahu and Ketu birth story: राहु और केतु के बनने की कहानी समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है। ये दोनों ही एक ही शरीर के दो हिस्से हैं। अमृत पीने के कारण ये सदैव के लिए अमर हो गए। तो आइए जानते हैं इस लेख में कि ये दोनों ग्रह कैसे बने।
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Rahu and Ketu birth story: राहु और केतु छाया ग्रह हैं, इनका प्रभाव जातक के जीवन में बहुत गहरा पड़ता है। यदि जातक पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा तो जाकत को समस्त गुणों को स्वामी बना सकता है, वहीं दूसरी तरफ नकारात्मक प्रभाव पड़ने पर जातक को मानसिक और शारीरिक रूप से हानि पहुंचती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राहु और केतु एक ही शरीर के दो अभिन्न अंग हैं। तो आइए इस लेख में इसी विषय में चर्चा करते हैं कि राहु केतु कैसे बने।

राहु और केतु कैसे बने? - How were Rahu and Ketu formed?

सतयुग में जब देवताओं और दानवों के बीच समुद्र मंथन हुआ, तो उस दौरान समुद्र से कुल 14 रत्न निकले थे, जिनमें एक था अमृत कलश। अमृत कलश को भगवान धनवंतरि अपने हाथों में लेकर प्रकट हुए। देवता और राक्षस दोनों को ही पता था कि जो भी इसकी एक बूंद पिएगा वह अमर हो जाएगा। इसलिए अमृत कलश के लिए छीना झपटी हुई और इस दौरान अमृत की 4 बूंदे गिर गईं और ये 4 बूंदें हरिद्वार, इलाहाबाद, उज्जैन और नासिक में गिरीं। सभी लोग अमर होने के लिए अमृत पान करना चाहते थे, लेकिन यदि राक्षस अमृत का सेवन कर लेते तो इस संसार का विनाश हो जाता, फिर भगवान विष्णु ने राक्षसों को ध्यान भटकाने के लिए मोहिनी अवतार धारण किया और अमृत कलश को अपने पास रखा। मोहिनी अवतार ने एक तरफ दानवों को, तो दूसरी तरफ राक्षसों को बिठाया और देवताओं को अमृत देने लगे और राक्षसों को पानी। लेकिन उन्हीं में से एक स्वर्भानु नाम का राक्षस था, जिसे पहले ही आभास हो गया था क मोहिनी अवतार के द्वारा राक्षसों के साथ छल किया जा रहा है, इसलिए स्वर्भानु पहले ही देवता का रूप धारण कर देवताओं के साथ एक पंक्ति में बैठ गया। लेकिन जैसे ही मोहिनी अवतार ने राक्षस को अमृत पिलाया, तो सूर्य और चन्द्रमा को आभास हो गया कि यह देवता नहीं है और उन्होंने ये बात मोहिनी अवतार को बताई। लेकिन तब तक अमृत की एक बूंद स्वर्भानु के गले में पहुंच चुकी थी और फिर मोहिनी अवतार भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से स्वर्भानु का सिर धड़ से अलग कर दिया। शरीर के 2 हिस्से तो हो गए, लेकिन अमृत पान के कारण सिर वाला हिस्सा बना राहु और धड़ बना केतु और दोनों ही हमेशा के अमर हो गए। तो इस प्रकार से एक ही शरीर से 2 राहु और केतु का जन्म हुआ। कुछ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह भी कहा जाता है कि ब्रह्म देव ने राहु को शरीर देने के लिए उसमें सांप का शरीर लगाया और केतु के लिए सांप का सिर। इसलिए आपने कुछ तस्वीरों में राहु केतु के सिर और धड़ में सांप की तस्वीर जरूर देखी होगी।
 

चन्द्र- सूर्य हैं राहु-केतु के दुश्मन  - Moon and Sun are enemies of Rahu and Ketu

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि जब स्वर्भानु देवताओं के साथ बैठा तो, सूर्य और चन्द्रमा को इस बात की खबर लग गई। इसके बाद उन्होंने इस बात की जानकारी विष्णु भगवान को दे दी। स्वर्भानु के 2 हिस्से होने के बाद राहु और केतु बने और दोनों की फिर चन्द्रमा से बैर खाने लगे। इसलिए कहा जाता है कि राहु और केतु सूर्य और चन्द्रमा को अपना दुश्मन मानते हैं। 

तो,  इस प्रकार से राहु और केतु 2 छाया ग्रह बने। यदि आप इस विषय से संबंधित अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमारे ज्योतिषाचार्यों से संपर्क करें।
 

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