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कालाष्टमी 2020 : कालाष्टमी व्रत कथा

MyJyotish Expert Updated 08 Jun 2020 08:51 PM IST
Kalashtami 2020: Kalashtami fast story
कालाष्टमी 2020 : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन महाकाल के रौद्र रूप कालभैरव की उपासना की जाती है। कालभैरव के बटुक रूप को सौम्य माना जाता है जिसके कारण ज्यादा अधिकतर उनके इसी रूप की आराधना की जाती है। कालभैरव की पूजा बहुत ही ध्यान पूर्वक करनी चाहिए। इनकी पूजा किसी भी व्यक्ति के बारें में बुरा सोचकर नहीं करनी चाहिए। इस दिन व्रत धारण करने का भी बहुत महत्व माना जाता है। माना जाता है की जो कोई भी कालभैरव को प्रसन्न करने में सफल होता है , कालभैरव उसकी सभी इच्छाओं की पूर्ति करतें है। इनकी आशीष की प्राप्ति से व्यक्ति के सभी कष्ट एवं बीमारियों का नाश होता है

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पौराणिक कथाओं में सर्वप्रचलित कथा तब की है जब एक बार महादेव के रूप को लेकर ब्रह्मा जी ने आपत्तिजनक बात बोल दी। उनकी बातें सुनकर महादेव बहुत क्रोधित हो उठे थे। उनके क्रोध के तेज से ही कालभैरव की उत्पत्ति हुई थी। शिव का कालभैरव स्वरुप ब्रह्मा की बात से इतने क्रोधित हो गए थे की अपने नाख़ून को हथियार बनाकर उन्होंने ब्रह्मा जी का मस्तिक्ष ही काट दिया था। उनका क्रोध इस तरह उबाल मार रहा था की उन्हें एहसास ही नहीं हुआ की जाने - अनजाने में उन्होंने ब्रह्म हत्या जैसा पाप अपने सिर पर उठा लिया था। गुस्सा शांत होने पर उन्हें जब अपनी गलती का ज्ञात हुआ तो वह इस पाप से मुक्ति पाने के लिए जगह - जगह भटकने लगे। भ्रमण करतें - करतें उन्होंने एक आकाशवाणी सुनी जहा उनसे कहा गया की उन्होंने ब्रह्म हत्या जैसा पाप किया है।

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इस पाप से मुक्ति पाने के लिए उन्हें काशी का कोतवाल बनना पड़ेगा और सदैव दूसरों की गलतियों को क्षमाकर उन्हें सुखद जीवन का आशीर्वाद प्रदान करना होगा। तभी से जो कोई भी कालाष्टमी के दिन कालभैरव की उपासना करता है  , उसके सभी कष्ट दूर हो जातें है। गंभीर रोग एवं दुखों का उसके जीवन में कोई स्थान नहीं होता है। कालभैरव की उपासना के साथ ही माँ काली की स्तुति करना बहुत फलदायी माना जाता है। कालभैरव की कृपा से भक्तों के समस्त व्यथा के कारण समाप्त हो जातें है तथा उन्हें सुखद जीवन का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। कालभैरव द्वारा प्रदान किए गए फल के कारण व्यक्ति का जीवन आनंदमय हो जाता है।

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