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Home ›   Blogs Hindi ›   Kala Bhairava Kavach: Kala Bhairava Kavach is a protective circle whose chanting removes all evil obstacles

Kala Bhairava Kavach : काल भैरव कवच ऎसा सुरक्षा चक्र जिसके जाप से दूर होती है ऊपरी बाधा

Acharyaa RajRani Updated 28 Jun 2024 12:43 PM IST
काल भैरव कवच
काल भैरव कवच - फोटो : myjyotish

खास बातें

Kaal Bhairav : किसी भी प्रकार की प्रेत बाधा या ऊपरी बाधा को दूर करने के लिए काल भैरव कवच होता है उत्तम उपाय। काल भैरव कवच का पाठ करने से दूर हो जाती हैं सभी तरह की परेशानियां और मिलता है सुख का आशीर्वाद।
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Kala Bhairava Kavach : काल भैरव कवच सुरक्षा चक्र जिसके जाप से दूर होती है ऊपरी बाधा, Kaal Bhairav किसी भी प्रकार की प्रेत बाधा या ऊपरी बाधा को दूर करने के लिए काल भैरव कवच होता है उत्तम उपाय। काल भैरव कवच का पाठ करने से दूर हो जाती हैं सभी तरह की परेशानियां और मिलता है सुख का आशीर्वाद। 

Bhairav Puja: अगर किसी व्यक्ति पर कोई गलत चीजों का प्रभव है या किसी प्रकार का नकारतमक असर बना हुआ है तो ऎसे में काल भैरव कवच का पाठ करने से स्थिति में जल्द से सुधार होता है। इसी के साथ राहु और शनि का कोई दोष है तो उन लोगों के लिए भी काल भैरव कवच बेहद लाभदायक होता है। 
 

काल भैरव कवच के लाभ Benefits of Kala Bhairava Kavach 

काल भैरव पूजन को बेहद विशेष अनुष्ठान के रुप में जाना जाता है। जीवन में किसी भी प्रकार के भय से मुक्ति के लिए इनकी पूजा करनी चाहिए। पूजा के साथ ही इनके कवच का पाठ करने से सुरक्षा की प्राप्ति होती है। भगवान काल भैरव भगवान शिव के उग्र अवतार हैं। भैरव को आवेश अवतार के नाम से भी जाना जाता है।

कहा जाता है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में राहु और शनि का दोष हो, उन लोगों को काल भैरव देव की पूजा जरूर करनी चाहिए। आपको बता दें कि हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भैरव अष्टमी मनाई जाती है। इस दिन भगवान भैरव कवच करने का विशेष लाभ होता है। 

दरअसल भक्तों के लिए काल भैरव बहुत जल्द प्रसन्न होने वाले देवता माने जाते हैं।  काल भैरव भगवान शिव का स्वरूप होने के कारण भगवान शिव की पूजा से भी शीघ्र प्रसन्न होते हैं। भगवान भैरव की कृपा भक्तों को सुख प्रदान करती है। जहां भगवान काल भैरव जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है वहां कभी कोई नकारात्मका प्रवेश नहीं कर पाती है। 
 

काल भैरव कवच 

ॐ सहस्त्रारे महाचक्रे कर्पूरधवले गुरुः .
पातु मां बटुको देवो भैरवः सर्वकर्मसु ॥

पूर्वस्यामसितांगो मां दिशि रक्षतु सर्वदा .
आग्नेयां च रुरुः पातु दक्षिणे चण्ड भैरवः ॥

नैॠत्यां क्रोधनः पातु उन्मत्तः पातु पश्चिमे .
वायव्यां मां कपाली च नित्यं पायात् सुरेश्वरः ॥

भीषणो भैरवः पातु उत्तरास्यां तु सर्वदा .
संहार भैरवः पायादीशान्यां च महेश्वरः ॥

ऊर्ध्वं पातु विधाता च पाताले नन्दको विभुः .
सद्योजातस्तु मां पायात् सर्वतो देवसेवितः ॥

रामदेवो वनान्ते च वने घोरस्तथावतु .
जले तत्पुरुषः पातु स्थले ईशान एव च ॥

डाकिनी पुत्रकः पातु पुत्रान् में सर्वतः प्रभुः .
हाकिनी पुत्रकः पातु दारास्तु लाकिनी सुतः ॥

पातु शाकिनिका पुत्रः सैन्यं वै कालभैरवः .
मालिनी पुत्रकः पातु पशूनश्वान् गंजास्तथा ॥

महाकालोऽवतु क्षेत्रं श्रियं मे सर्वतो गिरा .
वाद्यम् वाद्यप्रियः पातु भैरवो नित्यसम्पदा ॥

यदि आप इससे संबंधित अधिक जानकारी चाहते हैं, तो हमारे ज्योतिषाचार्यों से संपर्क करें।
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