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Guru in 12 Houses: कुंडली का नवम भाव बृहस्पति का है पक्का घर, जानें समस्त भावों में कैसा मिलता है फल

Nisha Thapaनिशा थापा Updated 10 Jul 2024 05:11 PM IST
कुंडली के सभी 12 भावों में बृहस्पति की स्थिति
कुंडली के सभी 12 भावों में बृहस्पति की स्थिति - फोटो : My Jyotish

खास बातें

Guru in 12 Houses: कुंडली के समस्त भावों में गुरु बृहस्पति की स्थिति अलग-अलग होती है। किसी भाव में बृहस्पति शुभ फल देता है, तो किसी में अशुभ तो आइए जानते हैं कि समस्त 12 भावों में बृहस्पति का होना क्या दर्शाता है।
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Guru in 12 Houses: गुरु बृहस्पति विद्या और शक्ति के अधिष्ठात्री देवता है। बृहस्पति का पक्का घर नौवां घर है और बृहस्पति ग्रह के मित्र सूर्य, चंद्रमा एवं मंगल है, इसके साथ ही शत्रु ग्रह बुध और शुक्र हैं। बृहस्तपि का प्रत्येक जातक की कुंडली में अलग-अलग पड़ता हैं, हालांकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी कुंडली के कौन से भाव में बृहस्पति ग्रह विराजमान हैं। तो आइए इस लेख के जरिए जानते हैं कि बृहस्तपि ग्रह विभिन्न भावों में क्या फल देता है।
 

पहले भाव में बृहस्पति (Jupiter in 1st house)

 

जिन जातकों की कुंडली के पहले भाव में बृहस्पति ग्रह विराजमान होते हैं, वो जातक बहुत ही समझदार होते हैं। लाल किताब के अनुसार ऐसे जातक 16 वर्ष की आयु से ही अपने कंधों में जिम्मेदारी ले लेते हैं। इसके साथ ही यदि बृहस्पति ग्रह की दृष्टि 5, 7 या फिर 9वें भाव में पड़ रही है, तो जातक के संतान पक्ष और स्त्री पक्ष से भाग्य के द्वार खुलते हैं। 
 

दूसरे भाव में बृहस्पति (Jupiter in 2nd house)

 

जिन जातकों की कुंडली के दूसरे भाव में बृहस्पति ग्रह विराजमान होता है, वो जातक भाग्यशाली होते हैं।  इस भाव में बृहस्पति ग्रह बैठकर जातक के भाग्य के द्वार खोल देता है। यदि यह नीच भाव का नहीं हुआ तो जातक को  75 साल की उम्र तक खुशहाल जिंदगी देता है। 
 

तीसरे भाव में बृहस्पति (Jupiter in 3rd house)

 

तीसरे भाव में बृहस्पति की स्थिति भी शुभ फल देती है। ऐसे जातक जिस कार्य में सिद्धि प्राप्त करना चाहते हैं वह प्राप्त कर लेते हैं, वहीं जिस काम को यह जातक बिगाड़ना चाहते हैं उसे बिगाड़ कर ही छोड़ते हैं। ये जातक 40 साल तक अपने परिवार की खूब सेवा करते हैं और समाज में एक आदर्श बनते हैं। यदि इन जातकों पर मंगल का प्रभाव पड़ जाए तो इनका जीवन और भी बेहतर बन जाता है।
 

चौथे भाव में बृहस्पति (Jupiter in 4th house)

 

यदि किसी जातक की कुंडली के चौथे भाव में बृहस्पति ग्रह विराजमान है, तो वह जातक को एक अच्छा पद दिलवाता है। इसके साथ ही चन्द्र ग्रह भी उच्च का होकर इन जातकों को अच्छा फल प्रदान करते हैं। लेकिन यदि दसवें भाव में बुध है, तो जातक को नुकसान हो सकता है और इन जातकों को 34 वर्ष के बाद कष्ट मिलना  शुरू हो जाता है।
 

पांचवे भाव में बृहस्तपि (Jupiter in 5th house)
 

जिन जातकों की कुंडली के पांचवे भाव में बृहस्पति ग्रह होता है उन्हें काफी शांति प्रदान करता है।  बृहस्पति का प्रभाव शनि की बूरे प्रभाव को भी शांत कर देता है।  इस जातकों की संतान पैदा होने के बाद से लेकर 60 वर्ष की उम्र तक अच्छा फल प्राप्त होता है।  
 

छठे भाव में बृहस्पति(Jupiter in 6th house)

 

यदि किसी जातक की कुंडली के छठे भाव में बृहस्पति ग्रह विराजमान है, तो उसके लिए शुभ नहीं माना जाता है। क्योंकि कुंडली का छठा घर केतु का पक्का घर होता है। इस भाव में बृहस्पति पुत्र, पिता और पुत्री के लिए अच्छा नहीं होता है। ऐसे जातक दूसरों की कमाई में अपना जीवन व्यतीत कर लेते हैं। इन जातकों के पास अधिक धन तो नहीं होता है, लेकिन किसी भी तरह से इनके परिवार का गुजारा चल जाता है।
 

सातवें भाव में बृहस्पति ग्रह (Jupiter in 7th house)

 

जिन जातकों की कुंडली के सातवे भाव में गुरु बृहस्पति ग्रह विराजमान  होते हैं  उन जातकों का 40 वर्ष की उम्र तक जीवन कष्टकारी बीतता है।  इसके बाद इन्हें संतान की सहायता मिलती है, जिसके बाद इन जातकों का जीवन सुखमयी बीतने लगता है।  लेकिन इन जातकों को अपने भाईयों से कष्ट मिलता है। 
 

आठवें भाव में बृहस्तपि (Jupiter in 8th house)


जिन जातकों की कुंडली के आठवें भाव में बृहस्पति ग्रह विराजमान होता है वह जातक अपने माता पिता से दूर रहता है,  जिसके कारण ये जातक अपने माता पिता की सेवा भी नहीं कर पाते हैं। इस जातकों को अपने घर की चिंता भी नहीं होती है।
 

नौवें भाव में बृहस्पति (Jupiter in 9th house)

 

नौवां घर बृहस्पति का पक्का घर होता है और जिन जातकों की कुंडली के नौवें भाव में बृहस्पति ग्रह विराजमान होता है उन्हें हर प्रकार से लाभ ही लाभ प्राप्त होता है। ये जाकत अपने कार्य में उन्नति प्राप्त करते हैं और  ये जातक बुद्धिमान होते हैं।  इसके साथ ही ये जातक अपने वचन के पक्के होते हैं, ये जातक कुछ कहते हैं, तो उनके लिए पत्थर की लकीर होती है। हालांकि यदि बृहस्पति ग्रह नीच के हो जाए तो इन जातकों को विपरीत  परिणाम भी देते हैं।
 

दसवें भाव में बृहस्पति (Jupiter in 10th house)

 

दसवें भाव में बृहस्पति की स्थिति शुभ नहीं मानी जाती है। ये जातक सूखे पेड़ के समान माने जाते हैं। ये जातक मेहनत को बहुत करते हैं, लेकिन इन्हें अपनी मेहनत का उचित फल नहीं मिल पाता है। लेकिन इस स्थिति को सूर्य ग्रह की सहायता से ठीक किया जा सकता है।  
 

ग्यारहवें भाव में बृहस्पति (Jupiter in 11th house)

 

जिन जातकों की कुंडली के 11वें भाव में बृहस्पति ग्रह होते हैं, वो जातक सर्वगुण संपन्न वाला होता है।  इसके साथ ही इस भाव में बृहस्पति की स्थिति इनके भाग्य का उदय करवाती है। यदि इन जातकों का बुध अच्छा होता है, तो इनके लिए  शुभ होता है अन्यथा इन्हें कष्ट भी भोगने पड़ते हैं। 
 

बारहवें भाव में बृहस्पति (Jupiter in 12th house)

 

यदि किसी जातक की कुंडली के 12वें भाव में बृहस्पति ग्रह उपस्थित हैं, तो जातक को कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत है। ऐसे जातकों को माला धारण नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने पर इसके शत्रु ग्रह बुध, बृहस्पति के साथ मिल जाते हैं और जातक को विपरीत परिणाम देते हैं। 

तो इस प्रकार से कुंडली के विभिन्न भावों में बृहस्पति की स्थिति विभिन्न फल प्रदान करती है। लेकिन यदि  आप इससे संबंधित अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमारे ज्योतिषाचार्यों से संपर्क करें।

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