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Krishna Janmashtami 2020: इन कलाओं में सर्व- श्रेष्ठ थे नन्दलाल

Myjyotish Expert Updated 09 Aug 2020 05:53 PM IST
कृष्ण जन्माष्टमी
कृष्ण जन्माष्टमी - फोटो : Myjyotish

धन संपन्नता
श्री कृष्ण की सर्व प्रथम कला थी। धन - धान्य से परिपूर्णता होना। उनके घर से कोई भी खाली हाथ नहीं जाता था। उन्हें शारीरक एवं मानसिक तौर पर किसी प्रकार से भी धन की कोई कमी नहीं थी। वह सदैव दूसरों के हित में कार्य किया करते थे।

भू - अचल सम्पति
यह कला उस व्यक्ति में होती है जो स्वयं इस संसार का एक बहुत बड़ा भागीदार होता है। जिसमें इस पृथ्वी के राज को भोगने की क्षमता होती है। श्री कृष्ण ने स्वयं द्वारका पूरी का निर्माण कर उसे बसाया था। वहां रहने वाला हर व्यक्ति उनकी आज्ञा का पालन करता था।

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कीर्ति - यश एवं प्रसिद्धि
यह वह व्यक्ति होता है जिसका मान - सम्मान सारे जगत में किया जाता है। जिसपर लोग आँखें मीचकर बहुत भरोसा करतें है ,जो कभी किसी को निराश नहीं करता। आज भी लोग सच्चे मन से श्री कृष्ण की आरधनाकर उनका जय - जयकार करतें है।

लीला आनंद उत्सव
श्री कृष्ण को बाल्यावस्था से ही लीलाधर के नाम से जाना जाता है। उनकी लीलाएं तो चारों दिशाओं में प्रसिद्ध है। उनका सम्पूर्ण जीवन ही लीला एवं रोचक घटनाओं से भरा हुआ है।

विद्या - मेधा बुद्धि
भगवान् श्री कृष्ण बहुत बुद्धिमान एवं समझदार थे। उनकी चतुराई एवं बुद्धिमानी के कारण ही वह बड़े से बड़ा संकट भी दूर करने में परिपूर्ण थे। वह वेद , युद्ध एवं संगीत विद्या में भी कुशल थे।

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सत्य यथार्य
श्री कृष्ण कभी भी झूठ नहीं बोलतें थे। अर्थात सत्य कितना ही कड़वा क्यों न हो वह सदैव सत्य का साथ ही देते थे। वह धर्म की रक्षा के लिए सत्य को परिभाषित करना भी जानते थे। एक कथा के अनुसार जब शिशुपाल की माता ने श्री कृष्ण से पूछा की क्या उनके पुत्र शिशुपाल की हत्या श्री कृष्ण के हाथों से होगी , तब श्री कृष्ण ने बिना संकोच किए हां में उत्तर दिया और कहा की यही विधि का विधान है और यह होकर ही रहेगा।

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