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Home ›   Blogs Hindi ›   Jagannath Yatra: Jagannath Puri Yatra is starting from 7th July, know its mythological importance

Jagannath Rath Yatra 2024: 7 जुलाई से शुरू हो रही है जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा, जानें पौराणिक महत्व

Nisha Thapaनिशा थापा Updated 02 Jul 2024 04:30 PM IST
जगन्नाथ पुरी का पौराणिक महत्व
जगन्नाथ पुरी का पौराणिक महत्व - फोटो : My Jyotish

खास बातें

Jagannath Rath Yatra 2024: जगन्नाथ यात्रा की शुरूआत 7 जुलाई से हो रही है और इस रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलराम और सुभद्रा जी शामिल होते हैं।  तो आइए जानते इस लेख के जरिए जानते हैं कि जगन्नाथ रथ यात्रा का क्या महत्व है।
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Jagannath Rath Yatra 2024: 7 जुलाई से जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा शुरू हो रही है और इस दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा का हिस्सा बनने के लिए उड़ीसा जाते हैं, जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा प्रत्येक वर्ष आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीय से शुरू होती है और इस दिन भगवान जगन्नाथ के साथ उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा को तीन अलग-अलग सवार होकर उनकी यात्रा करवाई जाती है। बहुत से लोगों को जगन्नाथ पुरी की यात्रा के बारे जानकारी तो होती है, लेकिन वह इसके पौराणिक महत्व के विषय में नहीं जानते है। तो आइए तो लिए आज इस लेख में इसी विषय में चर्चा करते हैं। 

कब से शुरु है जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा (Jagannath Puri Yatra 2024)


जगन्नाथ पूरी रथ यात्रा 7 जुलाई से शुरू हो रही है। जगन्नाथ पुरी यात्रा प्रत्येक वर्ष शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होती है और इस बार द्वितीया तिथि 7 जुलाई को पड़ रही है। द्वितीया का आरंभ सुबह 4:26 से शुरू होगा और इसका समापन अगले दिन 8 जुलाई को सुबह 4:59 पर होगा। यानी कि 7 जुलाई को द्वितीया का उदय है, तो इसलिए 7 जुलाई से जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा प्रारंभ होगी।
 

जगन्नाथ पुरी यात्रा का पौराणिक महत्व (Importance of Jagannath Puri Yatra)


प्रचलित पौराणिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा यानि कि स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ का जन्मदिन होता है और इस दिन वह अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ अपने रत्न सिंहासन से उतरकर स्नान के लिए जाते हैं। इस दौरान उन्हें 108 कलशों से शाही स्नान कराया जाता है, फिर स्नान के बाद कहा जाता है कि वह बीमार पड़ जाते हैं और उन्हें बुखार आ जाता है। इस दौरान उन्हें 15 दिन तक विशेष कक्ष में रखा जाता है। मंदिर के सेवकों और वेद्यों के अलावा किसी और को प्रभु से मिलने की अनुमति नहीं होती है। जब मंदिर में जगन्नाथ जी नहीं होते हैं, तो उनके स्थान पर जगन्नाथ जी के प्रतिनिधि अलारनाथ की मूर्ति को स्थापित किया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। 15 दिनों के बाद जगन्नाथ जी स्वस्थ्य हो जाते हैं और तब उन्हें उस कक्ष के बाहर लाया जाता है। फिर वह समस्त भक्त जनों को दर्शन देने के लिए आषाढ़ मास की द्वितीया के दिन अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ रथ यात्रा पर बाहर निकलते हैं और पूरे नगर का भ्रमण करते हैं। 

एक और धार्मिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि एक बार भगवान श्री कृष्ण जी की भहन सुभ्रदा ने नगर भ्रमण की इच्छा जाहिर की, जिसे पूरा करने के लिए भगवान श्री कृष्ण और बलराम जी अपने बहन सुभद्रा को लेकर नगर भ्रमण के लिए निकल पड़े। कहा जाता है कि तीनों लोग अलग-अलग रथ में सवार होकर गए और नगर की प्रजा ने प्रभु के दर्शन किए और उनका आभार प्रकट किया और फिर तब से ही जगन्नाथ पूरी की यात्रा शुरु हुई।

जगन्नाथ पुरी यात्रा के तीन रथों के नाम (Jagannath Puri Rath name)


जगन्नाथ  पुरी की यात्रा में भगवान जगन्नाथ के रथ को गरुड़ध्वज या फिर नंदीघोष कहा जाता है।  बलराम जी के रथ को तालध्वज के नाम से जाना जाता है और सुभद्रा जी के ध्वज को पद्मध्वज के नाम से जाना जाता है।


गरुड़ध्वज (Garundhwaj)

भगवान जगन्नाथ जी के रथ को गरुड़ध्वज कहा जाता है और भगवान का यह रथ 16 पहियों वाला होता है। इसके साथ ही इस रथ की ऊंचाई 13.5 मीटर होती है। गरुड़ध्वज में लाल और पीले रंग के वस्त्रों का उपयोग किया जाता है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु का वाहन गरूड़ है और इसलिए इनके रथ को गरुड़ध्वज कहा जाता है। रथ के शीर्ष में एक ध्वज होता है जिसे नंदीघोष कहा जाता है। 


तालध्वज (Taladhwaj)

तालध्वज भगवान के बड़े भाई बलराम जी का रथ है। इस रथ में कुल 14 पहिए होते हैं और यह 13.2 मीटर ऊंजा होता है। बलराम जी का यह ध्वज लड़की 763 टुकड़ों से बना है और इसकी सजावट के लिए  लाल और पीले हरे के वस्त्रों का उपयोग किया जाता है। इनके रथ के शीर्ष में लगे ध्वज को उनानी कहा जाता है। 

पद्मध्वज (Padmadhwaj)

जगन्नाथ जी की बहन सुभद्रा जी के रथ का नाम पद्मध्वज है और इनके रथ में कुल 12 पहिए होते हैं। पद्मध्वज 12.9 मीटर ऊंचा होता है।  कहा जाता है कि रथ के सारथ अर्जुन होते हैं और रथ के रक्षक जयदुर्गा हैं। इसके रथ में लाल और काले रंग का उपयोग किया जाता है।

तो इस प्रकार से जगन्नाथ पुरी यात्रा का यह महत्व है। यदि आप इससे संबंधित अधिक जानतकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमारे ज्योतिषाचार्यों से संपर्क करें।

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