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व्यापर में क्यों महत्वपूर्ण है ज्योतिष शास्त्र ?

Myjyotish Expert Updated 02 Aug 2020 11:09 AM IST
व्यापर : ज्योतिष शास्त्र
व्यापर : ज्योतिष शास्त्र - फोटो : Myjyotish

व्यक्ति किस तरह के व्यवसाय या नौकरी में अधिक सफलता प्राप्त करेगा इसका निर्धारण करने के लिए सबसे पहले यह निर्धारित करना पड़ता है कि व्यक्ति की लग्न कुंडली, चंद्र कुंडली व सूर्य कुंडली में से सबसे बलवान कुंडली कौन सी है। सूर्य, चंद्र और लग्न से दशम भाव के स्वामियों में से जो सबसे बलवान हो वह नवांश कुंडली में जिस राशि पर स्थित हो, उस राशि के स्वामी द्वारा व्यक्ति के व्यवसाय एवं नौकरी की जानकारी मिलती है। राशियों के स्वामी सिर्फ सात ग्रह ही होते हैं इसमें राहु-केतु को महत्व नहीं दिया जाता।

कुछ उदहारण इस प्रकार है:-
  • सूर्य से संबंधित व्यवसाय: सरकारी नौकरी, राजदूत, उपदेशक, मंत्र कार्य, फल विक्रेता, वस्त्र, ऊन, तृण, तांबा, स्वर्ण, माणिक, सींग या हड्डी के बने समान, खेती बाड़ी, धन विनियोग, बीमा एजेंट, सरकारी मुखबीर, प्रेत कार्य।
  • चंद्र से संबंधित व्यवसाय: जल से उपरत्न वस्तुएं, जल, मोती, मूंगा, शंख, क्राॅकरी, जनसंपर्क अधिकारी, जादूगर, फोटोग्राफिक्स व वीडियो मिक्सिंग, वस्त्र व्यवसाय, विदेशी कार्य, दूध, सब्जी, आयुर्वेदिक दवाएं, मनोविनोद के कार्य।
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  • मंगल से संबंधित व्यवसाय: धातु कार्य, पुलिस व सेना की नौकरी, अग्नि कार्य, साहसिक कार्य, सर्कस, वकालत, गवाह, ब्यूटी पार्लर, नौकरी दिलवाने के कार्य, अर्जीनवीस, शक्तिवर्धक कार्य, अग्निबीमा, बिजली, चूल्हा, ईंधन, पारा, पत्थर, खून बेचना, शल्य कार्य, नाई, केमिस्ट, मकेनिक, चोरी का कार्य, भूमि के कार्य, मिट्टी का समान।
  • बुध से संबंधित व्यवसाय: व्यापार कार्य, वेदों का अध्यापन, लेखन कार्य, ज्योतिष कार्य, प्रकाशन का कार्य, शिल्पकला, काव्य रचना, गायन विद्या, वैद्य, वनस्पति, बीजों व पौधों का कार्य, ब्याज, बट्टा, पूंजी निवेश, समाचार पत्र, दलाली के कार्य।
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  • बृहस्पति से संबंधित व्यवसाय: ब्राह्मण का कार्य, धर्मोपदेश का कार्य, बैंकिंग कार्य, राजनीति, अर्थशास्त्र, पुराण, गृह निर्माण, उत्तम फर्नीचर, शयन उपकरण, गर्भ संबंधित कार्य, मांगलिक कार्य, अध्यापन कार्य, व्याज कार्य, खाने पीने की वस्तुएं, स्वर्ण कार्य।
  • शुक्र से संबंधित व्यवसाय: सोना, चांदी, हीरा, रेस्टोरेंट, होटल, विवाह से संबंधित कार्य, महिलाओं से संबंधित कार्य, उत्तम वस्त्र, संगीत, एक्टिंग, वेश्यावृति, दही, सेंट, पशु चिकित्सा, सचिव, मंत्री, शास्त्रकार, काम कला।
इसलिए मनुष्य को अपने ग्रहो के अनुरूप ही किसी व्यवसाय का आरंभ करना चाहए ताकि बाद में उसे किसी प्रकार के दिक्कतों का सामना ना करना पड़े, अगर मनुष्य अपने ग्रहों  के हिसाब से अपना व्यवसाय की शुरुआत करेगा तो उसे अवश्य सफलता मिलेगी।
 

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