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जानिए इस वर्ष किस तिथि को है हरितालिका तीज व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व महत्व

my jyotish expert Updated 06 Sep 2021 10:29 AM IST
hartalika 2021
hartalika 2021 - फोटो : google
हरतालिका तीज का पर्व पंचांग के अनुसार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 9 सितम्बर, गुरुवार को मनाया जाएगा। यह व्रत करवाचौथ की तरह बड़ा व्रत माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत से अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति  होती है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए एवं कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। इस व्रत में गणेश जी, भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा होती है। हरतालिका तीज से पहले सावन में हरियाली एवं कजरी तीज मनाई जाती है। इस पर्व को मुख्यतः उत्तर भारत में मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि में इसे श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। इस व्रत में महिलाएं 24 घंटे तक निर्जल व्रत करती हैं। बिना अन्न एवं जल के व्रत किया जाता है। क्षेत्रों के अनुसार कहीं कहीं फल खा लिए जाते हैं। इस व्रत पर महिलाओं के मायके से नए कपड़े, फल, मिठाई, सुहाग का सामान आता है। इस व्रत को मुख्यतः पति की दीर्घायु एवं रोगमुक्ति हेतु किया जाता है।

इस वर्ष हरतालिका तीज पर बन रहा है रवियोग

इस तीज पर लगभग 14 वर्ष के बाद रवि योग का संयोग बन रहा है। ज्योतिषशास्त्र में इस योग को प्रभावशाली माना गया है। मान्यता है कि इस योग से कई अशुभ योग दूर हो जाते हैं। व्रत का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 10 मिनट से 7 बजकर 54 मिनट तक है। वहीं पंचांग के अनुसार रवियोग का संयोग 5 बजकर 14 मिनट से प्राप्त होगा। अगर कुंवारी लड़कियां इस योग में शिव -पार्वती की पूजा करें तो वैवाहिक बाधाएं दूर हो जाएंगी।

हरतालिका तीज के शुभ मुहूर्त 2021
हरतालिका तीज के दिन एक मुहूर्त सुबह एवं दूसरा प्रदोष काल में सूर्यास्त के बाद है। 

सुबह का मुहूर्त- 
प्रातःकाल का शुभ मुहूर्त 06 बजकर 03 मिनट से 08 बजकर 33 मिनट के मध्य में है। यह समय करीब 02 घंटे 30 मिनट का है। 

प्रदोष पूजा मुहूर्त- 
यह मुहूर्त शाम 06 बजकर 33 मिनट से 08 बजकर 51 मिनट तक है। यह समय करीब 02 घण्टे 18 मिनट का है।

हरतालिका तीज की पूजन सामग्री
गीले काली मिट्टी, बालू रेत , बेलपत्र, शमीपत्र, केले का पत्ता, धतूरे का फल फूल, अकांव का फूल, तुलसी, मंजरी, जनैव, नाडा, वस्त्र, फुलहरा। माता पार्वती के लिए सुहाग सामग्री- मेहंदी, चूड़ी, बिछिया, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, कंघी, सुहाग पुड़ा, श्रीफल, कलश, अबीर, चंदन, घी-तेल, कपूर, कुमकुम, दीपक, घी, दही, शक्कर, दूध, शहद, पंचामृत आदि।

हरतालिका तीज की पूजा विधि

. हरतालिका तीज में श्री गणेश, भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा की जाती है।

. मिट्टी की तीन प्रतिमा बनाएं। भगवान गणेश को तिलक करें एवं दूर्वा अर्पित करें। 

. माता पार्वती को श्रृंगार का सामान, भगवान शिव को बेलपत्र,  शमिपत्रि अर्पित करें। 

. वस्त्र अर्पित करें, तीज व्रत की कथा सुनें या पढ़ें।

. श्रीगणेश जी की आरती करें, शिव पार्वती की आरती करने के बाद भोग लगाएं। 

हरतालिका तीज मुख्य मंत्र

. ॐ पार्वतीपतये नमः

. उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये

. कात्यायिनी महामाये महायोगिनीधीश्वरी नन्द-गोपसुतं देवि पतिं में कुरु ते नमः

. गण गौरी शंकराधारांगी यथा त्वं शंकर प्रिया। मां कुरु कल्याणी कांत कांता सुदुर्लभाम

हरतालिका तीज व्रत में ये करें तो बनेंगे सारे काम

. शिवपुराण के अनुसार अगर लाल एवं सफेद रंग के फूल से भोलेबाबा का पूजन करें तो मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

. यदि वैवाहिक जीवन में आपसी तालमेल सही नही है तो केसर के दूध से माता पार्वती का अभिषेक करें। 

. यदि माता पार्वती को शहद, गुण का भोग लगाकर दान किया जाए तो धन लाभ एवं दरिद्रता दूर होती है।

. भगवान शिव को चावल एवं तिल चढ़ाने से धन प्राप्ति एवं पापों का नाश होता है।

. यदि कोई रोगी है तो माता पार्वती को घी का भोग लगाकर दान करें सारे कष्टों से मुक्ति मिल जाएगी। 

. भगवान शिव को चमेली के फूल चढ़ाने से वाहन का सुख एवं अलसी का फूल चढ़ाने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

. यदि केसर, कर्पूर, अगरु एवं कमल के जल से माता पार्वती का अभिषेक करें तो पापों का नाश हो जाता है। 

. माता पार्वती का भोग आम, गन्ने के रस से करें तो धन एवं विद्या का वास होता है।

नारी के सुहाग की रक्षा करने वाले इस व्रत को अपने अक्षय सौभाग्य हेतु श्रद्धा एवं लग्नपूर्वक पूर्ण करती हैं। भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने ये व्रत रखा था, इसलिए इस पावन व्रत का नाम हरतालिका तीज रखा गया।
 
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