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जानें पवन पुत्र हनुमान से जुड़े 7 अनजाने तथ्य

My jyotish expert Updated 24 Aug 2021 02:27 PM IST
हनुमान जी
हनुमान जी - फोटो : Google
अजर अमर राम भक्त हनुमान को महाबली कहा गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार हनुमान जी को भगवान शिव का अवतार माना जाता है। पवन पुत्र के कुछ अनजानें रहस्य जिस से आप अंजान है और जानकर यकीनन चौंक जाएंगे। 
आपको आज हम ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जो शायद ही हर कोई जानता होगा। महाबली हनुमान से जुड़े ऐसे 7 रहस्य आज हम आपको बताने वाले हैं जो शायद ही आप जानते है। 
पवन पुत्र हनुमान ने आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया है इस बात का सबको भान है परंतु क्या आप यह जानते हैं कि हनुमान जी का एक पुत्र भी था। जी हां, हनुमान जी के आजीवन ब्रह्मचारी होने के बावजूद भी उनका एक पुत्र था।
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब हनुमान जी लंका की तरफ जा रहे थे तब उनका समना एक राक्षसी से हुआ था। उस से युद्ध के दौरान जब हनुमान जी थक गए तब उनके पसीने के बूंद एक मगरमछ के मुख में जा गिरी और उसने उसे निगल लिया। उस पसीने की बूंद के द्वारा मगरमच्छ के माध्यम से उनके पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम मकध्वज था।

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पवन पुत्र हनुमान जी के संस्कृत में 108 नाम है। हर नाम का एक अलग अर्थ है और वह उनके जीवन के अध्यायों का सार बताती है। इसलिए उनके 108 नाम बहुत ही प्रभावी हैं। 
माना जाता है कि हनुमान जी का जन्म कर्नाटक के कोपल जिले में हम्पी के निकट स्थित एक गांव में हुआ था। कहते हैं कि मतंग ऋषि के आश्रम में ही हनुमान जी का जन्म हुआ था। आज भी तुंगभद्रा नदी को पार करने पर अनेगुंदी जाते समय रास्ते में पंपा सरोवर आता है। पंपा सरोवर के निकट  स्थित एक पर्वत में शबरी गुफा है, जिसके निकट शबरी के गुरू मतंग ऋषि के नाम पर प्रशिद्ध मतगवन था। हम्पी में ऋष्यमूक के राम मंदिर के पास स्थित पहाड़ी आज भी मतंग पर्वत के नाम से जानी जाती है। कहा जाता है कि यहीं हनुमान जी का जन्म हुआ था। राम भक्त हनुमान जी का जन्म भगवान राम के जन्म से पहले चैत्र मास की शुक्ल पूपूर्णिमा के दिन हुआ था।

कहा जाता है कि भगवान राम के वरदान के अनुसार कल्प का अंत होने तक हनुमान इस धरती पर विराजमान रहेंगे। सीता माता के द्वारा मिले वरदान के अनुसार हनुमान चिरजीवी रहेंगे। इसी वरदान के चलते द्वापर युग में हनुमान जी ने भीम और अर्जुन की परीक्षा ली थी। वहीं कलियुग में उन्होंने तुलसीदास जी को दर्शन दिया। 
हनुमान जी ने ही तुलसीदास से कहा था कि 

चित्रकूट के घाट पै, भई संतन की भीर, तुलसी दास चंदन घिसै, तिलक देत रघुवीर 

श्रीमद् भागवत गीता के अनुसार हनुमान जी कलियुग में गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं। 
राम भक्त हनुमान जी माता जगदम्बा के सेवक भी हैं। मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी माता जगदंबा के आगे आगे चलते हैं और भैरव जी पीछे पीछे। माता के देशभर में जितने भी मंदिर है वहां उनके पास हनुमान जी और भैरव जी के मंदिर जरूर होते हैं। हनुमान जी की खड़ी मुद्रा में और भैरव की मंड मुद्रा में प्रतिमा होती है। कुछ लोग इसे माता वैष्णोदेवी की कहानी से जोड़कर देखते हैं।

हनुमान जी के पास कई वरदानी शक्तियां थीं, लेकिन फिर भी वे बगैर वरदानी शक्तियों के भी बेहद शक्तिशाली थे। ब्रह्मदेव से हनुमान जी को तीन वरदान प्राप्त हुए थे, जिनमें उन पर ब्रह्मास्त्र बेअसर होने का वरदान भी शामिल था। यही वरदान अशोक वाटिका में उनके काम आया था। 

सभी देवताओं की तरह हनुमान जी के पास खुद की शक्ति है। इस ब्रह्ममांड में ईश्वर के बाद यदि कोई एक शक्ति साक्षात रूप से विराजमान है तो वह हनुमान जी है। बजरंगबली के समक्ष किसी भी प्रकार की मायावी शक्ति नहीं ठहर सकती है। हर माया को हनुमान जी तोड़ देते हैं।

हनुमान जी का नाम हनुमान अपनी ठोडी की वजह से पड़ा था। संस्कृत में हनुमान का अर्थ बिगड़ी हुई ठोडी होता है। बचपन में सूर्य को निगल लेने के बाद जब इंद्र ने उनके मुख पर वज्र से प्रहार किया था तब उनकी ठोडी का आकार बदल गया था। इसके बाद वो हनुमान के नाम से विख्यात हुए।

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