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जानिए गुरुपर्व के उत्सव को गुरु नानक जयंती के रुप में क्यों मनाया जाता है

ज्योतिषाचार्य राज रानी Updated 19 Nov 2021 04:37 PM IST
Guru Nanak Jyanti
Guru Nanak Jyanti - फोटो : google
गुरुपर्व के उत्सव को गुरु नानक जयंती के रुप में प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. सिख धर्म के पहले गुरु नानक देव के जन्मोत्सव को गुरुपर्व के रुप में विश्वभर में हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है. गुरु नानक देव एक सामाजिक कार्यकर्ता, संत और यहां तक कि एक रचनाकार भी थे. गुरु नानक देव के पिता बाबा कालूचंद्र बेदी और माता तृप्ता जी थीं. गुरु नानक देव बचपन से ही बहुत आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे तथा परोपकारिता एवं दयालु स्वभाव उनके भीतर सदैव मौजूद रहता था. गुरु नानक जी से अन्य धार्मिक लोग हमेशा उनकी बौद्धिकता एवं विचारों से आकर्षित होते थे. गुरु नानक देव ने अपना गृहस्थ जीवन भी संपर्ण निष्ठा के साथ पूर्ण किया था. उनका विवाह सुलक्षणा से हुआ था और उनके दो बेटे हुए लेकिन, वह हमेशा समाज सेवा में लगे रहे. उनकी कुछ शिक्षाएँ इस प्रकार थीं: ईश्वर एक है, वह हर जगह और हर चीज में निवास करता है, ईश्वर की पूजा करने वाला व्यक्ति किसी भी चीज से नहीं डरता, व्यक्ति को ईमानदार और मेहनती होना चाहिए, पुरुष और महिला समान हैं, काम, क्रोध और लालच इत्यादि बातें बुरी चीजें हैं. उन्होंने अपना पूरा जीवन लोगों को विभिन्न चीजों के बारे में सिखाने में बिताया और वर्ष लगभग 70 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई।

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प्रकाशोत्सव 

गुरु नानक जयंती को गुरुपुरब और गुरु नानक प्रकाश उत्सव भी कहा जाता है. यह सिखों के सबसे बड़े और सबसे धार्मिक त्योहारों में से एक होता है और पूरी दुनिया में बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है. इस दिन गुरुद्वारों को रोशन किया जाता है. यह एक स्मरणोत्सव होता है सिख धर्म की शिक्षाओं का भी जिससे सभी भक्तों को उन शिक्षाओं को याद रखना चाहिए जिन पर उन्होंने जोर दिया और जीवन में सही और नैतिक तरीके से जीना सिखाया. 


गुरु नानक जयंती 

इस दिन गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ किया जाता है तथा प्रार्थनाएं होती हैं. नगर कीर्तन इत्यादि का आयोजन स्थान स्थान पर होते हैं. इसके साथ ही जुलूस निकाला जाता है इस समारोह में पालकी में पवित्र ग्रंथ ले जाया जाता है और भक्त धार्मिक भजनों और प्रार्थनाओं का पाठ करके पालकी का अनुसरण करते हैं. अमृत वेला के बाद, भक्त कथा और कीर्तन की रस्मों के साथ दिन बिताते हैं. लंगर इस त्योहार का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और इसे गुरु का लंगर या गुरु नानक जयंती लंगर कहा जाता है.

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