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Home ›   Blogs Hindi ›   Gupt Navratri 2024 : Know why Maa cut her head and became known as Maa Chhinnamasta

Gupt Navratri 2024 : जानें क्यों काटा माँ ने अपना मस्तक और कहलाईं छिन्नमस्ता

Acharya RajRani Updated 10 Jul 2024 12:14 PM IST
देवी छिन्नमस्ता
देवी छिन्नमस्ता - फोटो : myjyotish

खास बातें

Das Mahavidyas : गुप्त नवरात्रि में मां छिन्नमस्ता की पूजा द्वारा भक्तों को मिलता है शक्ति का वरदान हर प्रकार के रोग दोष से मिलती है मुक्ति. Das Mahavidyas माता छिन्नमस्ता के पूजन से दूर होते हैं सभी नकारात्मक प्रभाव. 

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Das Mahavidyas : गुप्त नवरात्रि में मां छिन्नमस्ता की पूजा द्वारा भक्तों को मिलता है शक्ति का वरदान हर प्रकार के रोग दोष से मिलती है मुक्ति। Das Mahavidyas माता छिन्नमस्ता के पूजन से दूर होते हैं सभी नकारात्मक प्रभाव। 

Ashadh Gupt Navratri 2024 : गुप्त नवरात्रि समय माता छिन्नमस्ता पूजा, और माता छिन्नमस्ता मंत्र जाप से मिलता है देवी का आशीर्वाद।   पौराणिक कथाओं के अनुसर देवी का यह स्वरुप हर प्रकार की सुरक्षा प्रदान करने वाला होता है। 

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दस महाविद्याओं में पंचम महाविद्या Fifth Mahavidya out of the ten Mahavidyas

Das Mahavidyas में से के हैं माता छिन्नमस्ता, जिन्हें चिंतपूर्णि माता के रुप में भी पूजा जाता है। सब प्रकार की चिंताओं को हर लेने वाली माता भक्तों को देती है चिंताओं से मुक्ति का आशीर्वाद। छिन्नमस्ता महाविद्या को दस महाविद्याओं में से पांचवीं साधना माना जाता है। मां छिन्नमस्ता पूजन एवं सुमिरन का पाठ करने से साधक जीवन के सभी पक्षों में सुखी रहता है।

साधक का शरीर स्वस्थ, सुंदर और आकर्षक बनता है।पौराणिक कथाओं में माता ने जब अपन अमस्त काटा तो माता को मिला छिन्नमस्ता नाम। माता की पूजा करने से साधक को भौतिक सुख, धन, वाद-विवाद में विजय, शत्रुओं पर विजय की प्राप्ति होती है।


देवी छिन्नमस्ता पौराणिक कथा Devi Chhinnamasta Puranik Katha


एक बार देवी पार्वती हिमालय में अपनी सखियों के साथ विहार कर रही होती हैं तभी उनकी दो सखियां जया और विजया मात के साथ काफी दूर निकल जाती हैं। ऎसे में मार्ग में सुंदर मंदाकिनी नदी कलकल करती हुई बह रही थी। उसका स्वच्छ जल देखकर देवी पार्वती को स्नान करने की इच्छा हुई। उन्होंने जया विजया को अपना इरादा बताया और उनसे भी स्नान करने को कहा। लेकिन वे दोनों भूखी थीं। उन्होंने कहा देवी, हमें भूख लगी है। हम स्नान नहीं कर सकते। 

देवी ने उन्हें कुछ समय रुकने को कहा जब देवी ने स्नान करने में बहुत समय लगा दिया। तब जया विजया ने देवी से कहा कि उन्हें कुछ खाने की इच्छा है। स्नान करते समय देवी ने कहा, मैं कुछ देर बाद बाहर आकर आपको कुछ खाने को दूंगी। लेकिन थोड़ी देर बाद जया विजया ने फिर से कुछ खाने के लिए कहा। इस पर देवी नदी से बाहर आईं और अपने हाथों में एक दिव्य तलवार प्रकट की और उस तलवार से उन्होंने देवताओं का वध कर दिया। उसने अपना सिर काट दिया,

देवी की कटी गर्दन से रक्त की धारा बहने लगी, तीन मुख्य धाराएं ऊपर उठकर जमीन की ओर आईं, तब देवी ने कहा जया विजया तुम दोनों मेरे रक्त से अपनी भूख मिटाओ, ऐसा कहकर दोनों देवियां पार्वती का रक्त पीने लगीं और देवी ने स्वयं अपने मुंह में रक्त की धारा लगा ली और रक्त पीने लगीं इस तरह उनकी क्षुधा शांत होती है जिसके पश्चात माता छिन्नमस्ता कहलाती हैं। 

देवी छिन्नमस्ता स्तुति मंत्र Devi Chhinnamasta Stuti Mantra

छिन्न्मस्ता करे वामे धार्यन्तीं स्व्मास्ताकम,
प्रसारितमुखिम भीमां लेलिहानाग्रजिव्हिकाम,
पिवंतीं रौधिरीं धारां निजकंठविनिर्गाताम,
विकीर्णकेशपाशान्श्च नाना पुष्प समन्विताम,
दक्षिणे च करे कर्त्री मुण्डमालाविभूषिताम,
दिगम्बरीं महाघोरां प्रत्यालीढ़पदे स्थिताम,
अस्थिमालाधरां देवीं नागयज्ञो पवीतिनिम,
डाकिनीवर्णिनीयुक्तां वामदक्षिणयोगत:।

छिन्नमस्ताद्वादशनामस्तोत्रम् 

छिन्नग्रीवा छिन्नमस्ता छिन्नमुण्डधराऽक्षता ।
क्षोदक्षेमकरी स्वक्षा क्षोणीशाच्छादनक्षमा ॥ १॥

वैरोचनी वरारोहा बलिदानप्रहर्षिता ।
बलिपूजितपादाब्जा वासुदेवप्रपूजिता ॥ २॥

इति द्वादशनामानि छिन्नमस्ताप्रियाणि यः ।
स्मरेत्प्रातः समुत्थाय तस्य नश्यन्ति शत्रवः ॥ ३॥

इति छिन्नमस्ताद्वादशनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

यदि आप इससे संबंधित अधिक जानकारी चाहते हैं, तो हमारे ज्योतिषाचार्यों से संपर्क करें।
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