Lord Kartikeya: Gauri's Son Kartikeya Offers Blessings Of Child Happiness - गौरी पुत्र कार्तिकेय प्रदान करते हैं संतान सुख का आशीर्वाद - Myjyotish News Live
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गौरी पुत्र कार्तिकेय प्रदान करते हैं संतान सुख का आशीर्वाद

My Jyotish Expert Updated 03 Apr 2020 05:10 PM IST
lord kartikeya: Gauri's son Kartikeya offers blessings of child happiness
महादेव और पार्वती जी के पुत्र श्री गणेश व कार्तिकेय की पूजा हिन्दू समाज में बहुत ही महत्वपूर्ण मानी गई है। अपने माता पिता के समान ही इनके पास भी दिव्य शक्तियां हैं और यदि यह दिव्य दृष्टि किसी पर पड़ जाए तो उस व्यक्ति को सभी प्रकार के सुख की प्राप्ति होती है। प्रत्येक माह की षष्टी को भगवान कार्तिकेय की उपासना की जाती है। इन्हे मुरुगन के नाम से भी जाना जाता है। प्रसिद्ध रूप से इनकी पूजा दक्षिण भारत ,श्रीलंका ,मलेशिया ,सिंगापुर आदि जगहों पर की जाती है। इनकी पूजा सदैव बाल रूप में की जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्यूंकि इनका जन्म 6 बालकों के रूप में  हुआ था। इनका पालन पोषण सप्त ऋषि की पत्नी कृतिका ने किया थी, जिसके कारण उन्हें कार्तिकेय धातृ भी कहा गया है।

प्रत्येक माह की षष्टी तिथि को कार्तिकेय जी की पूजा करना अति आवश्यक होता है।  ऐसा करने से संतान प्राप्ति व संतान से जुड़ें दुखों का नाश होता है। इस दिन व्रत करना बहुत फलदायी होता है जिसके कारण हर माँ को यह उपवास करना चाहिए। इस व्रत से उनके बच्चे पर आए सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। स्कंद षष्टी के दिन कार्तिकेय जी को समर्पित होकर पूजने पर पुराणों में इसका अनूठा महत्व बताया गया है। इस दिन शिव और शक्ति की भी सच्चे मन से पूजा करनी चाहिए। पुत्र कार्तिकेय के साथ - साथ यदि इनकी पूजा की जाए तो वह शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं। अपने भक्तों को किसी चीज़ की कमी नहीं होने देते। खुशियों से उनका जीवन भर देते हैं।

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कथन के अनुसार जब भगवान शिव माँ सती के वियोग में थे तब तारकासुर नाम के असुर ने मौक़े का फ़ायदा उठाकर देवों पर आक्रमण कर संसार में विनाश करना शुरू कर दिया था। देवों के अनुरोध से शिव और माता पार्वती ने कार्तिकेय जी की उत्पत्ति की गयी। यह 6 अलग - अलग अप्सराओं के गर्भ से 6 बालकों के रूप जन्में थे। वह सभी बालक तत्पश्चात एक ही में सम्मिलित हो गए थे। कार्तिकेय ने ही तारकासुर का वधकर देवों को उनका स्थान दिलाया था। मान्यतों के अनुसार देवी स्कंदमाता कार्तिकेय की माता थी। यदि उनकी पूजा कार्तिकेय जी की पूजा के साथ की जाएं तो वह शीघ्र ही प्रसन्न हो जाती हैं।

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