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गंगा दशहरा 2020 : राजा भागीरथी के तप से प्रसन्न हुई थी माँ गंगा

MyJyotish Expert Updated 31 May 2020 06:31 PM IST
Ganga Dussehra 2020: Mother Ganga was pleased with the tenacity of King Bhagirathi
गंगा दशहरा 2020 : 1 जून 2020 को मनाया जाने वाला गंगा दशहरा का महापर्व , माँ गंगा के कल्याण एवं पवित्रता का प्रतिक है। माँ गंगा की शक्ति के समक्ष किसी भी नकारात्मकता का वास करना असंभव है। स्नान - दान का यह महापर्व हर वर्ष जेष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। माँ गंगा के आशीर्वाद से व्यक्ति का जीवन शुद्ध हो जाता है। माँ गंगा का आशीष जिस व्यक्ति के साथ होता है उसे किसी प्रकार की विपदा का सामना नहीं करना पड़ता है। माँ गंगा परोपकारी है , उनकी महिमा असीम है जो बड़े से बड़े संकट को भी क्षण भर में ही समाप्त कर देती है।

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पौराणिक कथनों के अनुसार सगर नाम के एक राजा हुआ करतें थे। वह बहुत प्रतापी एवं बलशाली राजा थे। राजा सगर ने जग कल्याण हित के लिए महा यज्ञ का आयोजन किया था। परन्तु यज्ञ में विग्न लाने के लिए देवताओं के राजा इंद्र ने यज्ञ का अश्व चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया था। अश्व न होने के कारण यज्ञ का सफल जाना असंभव था। चारों ओर अश्व की खोज की जा रही थी परन्तु कही कोई निशान प्राप्त नहीं हो रहा था। तब सगर के 60 हजार पुत्र अश्व की खोज करतें - करतें कपिल मुनि के आश्रम में जा पहुचें। जब उन्होंने अश्व को वह देखा तो आश्रम पर ही धावा बोल दिया।

चारों ओर मचें कोलाहल को सुनकर कपिल मुनि की तपस्या भंग हो गई और वह अपने तप से बाहर निकल आए। तप भंग होने से वह बहुत क्रोधित हो उठें थे।  जैसे ही उन्होंने अपनी आखें खोली उनके क्रोध से सगर के सभी पुत्र भस्म हो गए। यह बात जब सगर के पौत्र भागीरथी को पता चली तो वह उन सभी के मोक्ष प्राप्ति के लिए कपिल मुनि से आग्रह करने लगे। कपिल मुनि ने बताया की इन सभी को मुक्ति मिल सकती है यदि गंगा का निर्मल जल इनपर छिड़का जाएं। यह सुनकर भागीरथी माँ गंगा को प्रसन्न करने हेतु कठोर तप करने लगे। माँ गंगा का धरती पर अवतरण का अर्थ था समस्त चरा - चर जगत में तबाही मच जाना। परन्तु वह फिर भी पूर्ण निष्ठा से माँ गंगा से प्रार्थना करतें रहे।

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माँ गंगा उनके तप से प्रसन्न हुई और धरती पर अवतार लेकर उन् सभी को मोक्ष प्राप्ति का आशीर्वाद प्रदान किया।
माँ गंगा को महाकाल ने अपनी जटाओं में वास का स्थान प्रदान किया जिससे धरती पर विनाश न हो। तभी से माँ गंगा की प्रवाह गंगोत्री से निकलकर पुरे भारत में भ्रमण करती है। और कुछ इसी तरह भागीरथी के कठोर तप से खुश हो कर प्रकट हुई थी माँ गंगा।

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