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गणेश चतुर्थी के अन्य नामों से लेकर ज़रूरी अनुष्ठानों तक, जानें ये ज़रूरी बातें

ज्योतिषाचार्य राज रानी Updated 09 Sep 2021 04:47 PM IST
गणेश चतुर्थी 2021
गणेश चतुर्थी 2021 - फोटो : google
श्री गणेश भगवान ज्ञान, धन और सौभाग्य के देवता हैं. इनके स्मरण मात्र से ही सभी कष्ट दूर हो जाते हैं गणेश चतुर्थी का समय हर मास में दो बार आता है. एक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के रुप में और दूसरा कृष्ण पक्ष चतुर्थी के रुप में पर इन सभी में भाद्रपद माह के समय पर आने वाली चतुर्थी अत्यंत भव्य रुप से मनाई जाती है. पंचचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. यह त्योहार सभी देवताओं में प्रथम आराध्य भगवान गणेश की पूजा करने और उन्हें प्रसन्न करने का यह सबसे अच्छा अवसर होता है।   माना जाता है की भगवान को उनका पसंदीदा भोग लगाने से वो मनोकामना पूर्ण करते है और भक्तो पे अपनी कृपा दृष्टी बनाए रखते है। मान्यता है कि किसी भी नए काम को शुरू करने से पहले, भगवान गणेश की पूजा का अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है. गणपति जी का आशीर्वाद न केवल आगे बढ़ने की शक्ति देता है,  ज्ञान देता है, बल्कि सफलता की राह में आने वाली बाधाओं को भी दूर करता है. इस प्रकार यह त्योहार नई शुरुआत का उत्सव भी माना गया है और एक नई सुबह का प्रतीक बन जाता है. गणेश चतुर्थी आमतौर पर 10 दिनों का त्योहार है जो भारतीय कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद के महीने में शुक्ल पक्ष चतुर्थी से शुरू होता है. गणेश चतुर्थी उत्सव भाद्रपद शुक्ल पक्ष के चौदहवें दिन अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है. 

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गणेश चतुर्थी के अन्य नाम

गणेश चतुर्थी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. उत्तर भारत में गणेश चतुर्थी गणेश चतुर्थी नाम अधिक लोकप्रिय है, महाराष्ट्र में त्योहार को गणेशोत्सव, गणेशघर के रूप में भी जाना जाता है आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में, विनायक चविथी और तमिलनाडु में विनायक चतुर्थी के नाम से लोकप्रिय है. नाम चाहे कोई भी हो नाम के बावजूद गणेश चतुर्थी का जोश और उत्साह पूरे देश में एक जैसा ही रहता है. 

गणेश चतुर्थी का इतिहास

पौराणिक कथाओं के अनुसार, गणेशजी को देवी पार्वती ने चंदन के लेप से बनाया था जिसका उपयोग उन्होंने अपने स्नान के लिए करना था शक्ति के देवता होने के कारण, उन्होंने इतनी शक्ति से गणेश को जगाया कि युद्ध में बड़े से बड़े देवता भी उनका सामना नहीं कर सकें.  देवताओं के बीच युद्ध के दौरान, भगवान शिव ने गलती से गणेश का सिर काट दिया जिससे पार्वती का क्रोध भड़क उठा. देवी को शांत- संतुष्ट करने के लिए, भगवान शिव ने अन्य देवताओं के साथ गणेश की सूंड पर एक हाथी के बच्चे का सिर रख दिया, इसलिए हाथी के सिर वाले भगवान गणेश की रचना हुई. गणेश चतुर्थी के इस शुभ दिन पर, भगवान शिव ने घोषणा की कि गणेश ही एकमात्र ऐसे देवता होंगे जिनकी पूजा किसी अन्य भगवान से पहले की जाएगी और तभी उस पूजा का पूर्ण फल मिल सकेगा. गणेश जी को ज्ञान और शक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा जाता रहा है. 

गणेश चतुर्थी के अनुष्ठान

गणेशोत्सव महाराष्ट्र का सबसे बड़ा त्योहार है. इस त्योहार के लिए मिट्टी और रंग से भगवान गणेश की विभिन्न प्रकार की मूर्तियां बनाई जाती हैं.

पूजा की शुरुआत मंत्रों के जाप से होती है और भगवान को चंदन के लेप और कुमकुम से स्नान कराया जाता है. प्राणप्रतिष्ठा संपन्न होने पर अन्य कार्य आरंभ किए जाते हैं.  भगवान को अलग-अलग तरह के भोग अर्पित किए जाते हैं, जिसमें पारंपरिक 'मोदक' शामिल है जो नारियल और गुड़ से बनी मिठाई होती है. भोग के अतिरिक्त पूजा के लिए अन्य चीजें जैसे नारियल, गुड़, दूर्वा (एक विशेष प्रकार की घास) और लाल फूलों का भी उपयोग किया जाता है. परंपरागत रूप से, पूजा के लिए 21 मोदक और 21 दूर्वा आवश्यक होती हैं.

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