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Home ›   Blogs Hindi ›   Daan Punya: These people should not donate some things even by mistake

Daan Punya Niyam: भूलकर भी इन जातकों को नहीं करना चाहिए कुछ वस्तुएं का दान, वरना हो सकता है भारी नुकसान

Nisha Thapaनिशा थापा Updated 07 Jun 2024 12:00 PM IST
दान पुण्य नियम
दान पुण्य नियम - फोटो : My Jyotish

खास बातें

Daan Punya Niyam: यदि कोई उच्च ग्रह वाला जातक, उच्च ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करता है या फिर नीचे ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करता है, तो जातक के लिए यह नुकसानदायी साबित हो सकता है, उसके लिए यह नुकसान जहर की तरह काम करेगा और धीरे-धीरे उसकी जिंदगी में कठिनाइयां आने लगेंगी। तो आइए जानते हैं किन जातकों को किस प्रकार की वस्तुओं के दान से बचना चाहिए। 
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Daan Punya Niyam: हम सब बचपन से ही ये सुनते आएं हैं, कि दान देना पुण्य का काम होता है और इससे हमारा जीवन सुखमयी बीतता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दान देना कभी-कभी नुकसानकारी भी हो सकता है। ऐसा ही कुछ लाल किताब में भी लिखा गया है, लाल किताब के अनुसार यदि कुंडली के साथ ही वर्षफल में कोई ग्रह विशिष्ट रूप से आ जाता है, तो  दान नहीं करना चाहिए। और ऐसी स्थिति में यदि आप दान करते हैं, तो यह हानि का कारण बन सकता है। जिसके चलते आपकी यह हानि इसी वर्षफल में होगी उसके बाद नहीं होगी। तो आईए जानते हैं की परिस्थितियों में दान देना और लेना वर्जित होता है।
 

किन जातकों को दान नहीं देना चाहिए?

 

  • यदि किसी जातक की कुंडली के छठे चंद्रमा विराजमान है तो जातक को आम लोगों की भलाई के लिए किए गए कार्य जैसे की नल, तालाब, कुआ आदि बनाना या इससे संबंधित वस्तुओं का दान करना नुकसानदायी साबित हो सकता है। इसके अलावा यदि जातक अपनी कमाई का कुछ हिस्सा इन कार्यों के लिए दान करता है, तो भी जातक के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। इन लोगों के लिए इस प्रकार का दान करना इतना नुकसानदायक साबित होता है कि कभी-कभी वह संतान हैं भी हो सकते हैं, इसलिए इन लोगों को इस प्रकार के दान से बचना चाहिए। 
  • यदि किसी जातक की कुंडली के आठवें भाव में शनि विराजमान है, तो जातक को राहगीर के लिए धर्मशाला या फिर मुफ्त में आराम करने वाली जगह नहीं बनानी चाहिए। यह उसके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है और यदि ज्यादा ऐसा करता है तो वह स्वयं ही बेघर हो सकता है।
  • यदि किसी जातक की कुंडली के पहले भाव में शनि और पांचवें भाव में बृहस्पति विराजमान है, तो ऐसे जातकों को किसी भी गरीब, जरूरतमंद या राहगीर को तांबे का सिक्का नहीं दान में देना चाहिए। ऐसा करने से उसे अशुभ समाचार प्राप्त हो सकते हैं।
  • जब किसी जातक की कुंडली के दसवें भाव में बृहस्पति और चौथे भाव में चंद्र विराजमान होता है, तो जातक को मंदिर धार्मिक स्थान नहीं बनवाना चाहिए। यदि वह ऐसा करता है तो उसे गलत आरोप में सजा हो सकती है।
  • जिस व्यक्ति के नवें भाव में शुक्र ग्रह उपस्थित होता है उन्हें गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे, पुस्तक, दवा आदि का दान नहीं करना चाहिए। यदि जातक ऐसा करता है तो वह आर्थिक रूप से खुद के लिए गड्डा खोदने का कार्य कर रहा है।
  • लाल किताब कहती है कि यदि चंद्रमा आपके 12वें भाव में विराजमान है, तो आपको किसी भी साधु या फकीर को रोज रोटी नहीं खिलानी चाहिए। इसके साथ ही मुफ्त में विद्या देने के लिए कोई स्कूल गया संस्थान नहीं खोलना चाहिए। ऐसा करने से जातक के ऊपर बीमारियों और दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है।
  • अगर आपकी कुंडली के सातवें भाव में बृहस्पति विराजमान है तो जातक कोकिसी भी धर्मस्थल या फिर किसी भी साधु को मुफ्त में कपड़े नहीं देने चाहिए ऐसा करने से आप निर्धन बन सकते हैं और इसका असर आपकी संतान पर भी पड़ सकता है।
तो इस प्रकार से इन बातों को ध्यान में रखकर आपको अपनी कुंडली के अनुसार इन वस्तुओं का दान नहीं करना चाहिए। यदि आप इससे संबंधित अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप हमारे ज्योतिषाचार्य से संपर्क कर सकते हैं।
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