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Home ›   Blogs Hindi ›   Correct worship method and worship material for Purnima Vat Savitri Vrat

Vat Purnima: पूर्णिमा वट सावित्री व्रत में इस विधि से करें पूजन और जानें पूजा की सामग्री

Nisha Thapaनिशा थापा Updated 19 Jun 2024 03:43 PM IST
पूर्णिमा वट सावित्र व्रत
पूर्णिमा वट सावित्र व्रत - फोटो : My Jyotish

खास बातें

Vat Purnima: वट सावित्री व्रत वर्ष में 2 आता है, कुछ प्रांतों में यह व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन रखा जाता है और कुछ प्रातों में यह व्रत पूर्णिमा के दिन। 21 जून को पूर्णिमा व्रत है, तो आइए इस लेख में जानते हैं कि वट सावित्री व्रत की पूजन सामग्री और विधि क्या है।
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Vat Savitri Vrat 2024: वट सावित्री व्रत सनातन धर्म संस्कृति में एक महत्वपूर्ण व्रत में से एक है। इस दिन सुहागन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु की कामना के लिए इस व्रत का पारण करती है। कहा जाता है कि इस व्रत के पारण से सौभाग्यवती स्त्रियों के पति की अकाल मृत्यु से रक्षा होती है और अखंड सौभाग्य प्राप्ति होती है। वट सावित्री व्रत उत्तर भारत के प्रांतों में ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन रखा जाता है और वहीं महाराष्ट्र, गुजरात समेत दक्षिण भारत के प्रांतों में यह व्रत ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि को रखा जाता है। वट सावित्री पूर्णिमा व्रत 21 जून को है, तो आइए इस लेख में जानते हैं कि इस व्रत की सही विधि क्या है।
 

पूर्णिमा वट सावित्री व्रत का शुभ मुहूर्त


वट सावित्री पूर्णिमा व्रत 21 जून को है और ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि 21 जून 2024 को सुबह 06:01 बजे पर शुरु हो जाने वाली है और इसका समापन अगले दिन 22 जून 2024 को सुबह 05:07 बजे पर ही हो जाएगा, फिर इसके बाद प्रतिपदा का आरंभ हो जाएगी। इसलिए इसी मुहूर्त में आपको व्रत का पारण करना चाहिए।
 

पूर्णिमा वट सावित्री व्रत की पूजन विधि

 
  • ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा यानि की वट सावित्री व्रत के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए।
  • इसके बाद घर क मंदिर में पूजा करने के पश्चात व्रत रखने वाली महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती हैं। वृक्ष की जड़ों को गोबर और मिट्टी से लीप कर स्वच्छ किया जाता है। वृक्ष के तने पर रोली से स्वास्तिक का चिह्न बनाया जाता है।
  • वट के वृक्ष में लाल कपड़ पहनाया जाता है। वृक्ष के तने पर कलावा बांधा जाता है, इसके बाद फूलों और मालाओं से वृक्ष को सजाया जाता है।
  • वृक्ष के सामने एक कलश स्थापित किया जाता है। कलश में जल भरकर नारियल स्थापित किया जाता है। कलश को फलों और फूलों से सजाया जाता है।
  • व्रत रखने वाली महिलाएं पंचदेव की पूजा करती हैं।
  • इसके बाद सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी जाती है। यह कथा पतिव्रता के पवित्र धर्म का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
  • कथा सुनने के बाद व्रत रखने वाली महिलाएं वृक्ष की 7 बार परिक्रमा करती हैं। प्रत्येक परिक्रमा के बाद वृक्ष को जल अर्पित किया जाता है।
  • वृक्ष को फल, मिठाई, पान, सुपारी आदि अर्घ्य स्वरूप दिए जाते हैं।
  • वृक्ष के चारों ओर दीप जलाए जाते हैं और वृक्ष को धूप दी जाती है।
 

पूर्णिमा वट सावित्री व्रत की सामग्री

 

  • वट वृक्ष
  • जल
  • रोली
  • चावल
  • कलावा
  • फूल
  • फल
  • मिठाई
  • दीप
  • धूप
  • कलश
  • नारियल
  • पान
  • सुपारी
  • लाल कपड़ा

तो, इस प्रकार से आपको पूर्णिमा वट सावित्री व्रत का पारण करना चाहिए। यदि आप इससे संबंधित अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमारे ज्योतिषाचार्यों से संपर्क करें। 

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