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Chaturmas 2024: कब शुरू होगा चातुर्मास? अभी नोट कर लें चातुर्मास 2024 की डेट और नियम

Acharya RajRani Updated 27 Jun 2024 10:00 AM IST
चातुर्मास
चातुर्मास - फोटो : myjyotish

खास बातें

Chaturmas starting date इस साल 17 जुलाई 2024 से चातुर्मास शुरू हो जाएगा।  चार माह का योग चातुर्मास कहलाता है। इसे चौमासा भी कहा जाता है। इस समय भक्ति साधना ध्यान से संबंधित काम करने विशेष होते हैं। 
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Chaturmas starting date इस साल 17 जुलाई 2024 से चातुर्मास शुरू हो जाएगा।  चार माह का योग चातुर्मास कहलाता है। इसे चौमासा भी कहा जाता है। इस समय भक्ति साधना ध्यान से संबंधित काम करने विशेष होते हैं। 

Importance of Chaturmas इस साल देवशयनी एकादशी 17 जून को है और इसी दिन से ही चातुर्मास शुरू हो जाएगा। हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन से ही चातुर्मास का आरंभ होता है। इस दिन को देवशयनी एकादशी के रुप में भी जाना जाता है। 
 

कब से शुरू हो रहा है चातुर्मास 2024? When is Chaturmas 2024 starting?

इस साल चातुर्मास का आरंभ जुलाई माह में होगा। जुलाई माह के शुक्ल पक्ष से इस समय का आरंभ होगा। इस समय पर भगवान विष्णु आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को क्षीर सागर में विश्राम करने चले जाते हैं जिसके साथ ही सभी मांगलिक कार्यों को रोक दिया जाता है।

आने वाले कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी तिथि पर ही इस चातुर्मास की समाप्ति होती है क्योंकि तब श्री हरि जागते हैं, इसलिए कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहते हैं। चातुर्मास में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इस वर्ष चातुर्मास 17 जुलाई 2024 से 12 नवंबर 2024 तक रहने वाला है।


चातुर्मास का लाभ benefits of Chaturmas 

हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को चातुर्मास का आरंभ होता है इस दिन को बहुत ही विशेष रुप से लाभ देने वाला माना गया है। इस समय ध्यान साधना का उत्तम समय आरंभ होता है। भक्ति सिद्धि प्राप्ति के लिए यह समय बहुत शुभ होता है। इस दिन पर ही श्री हरि की योग निंद्रा शुरु होती है इस दिन की शुरुआत को एकादशी मनाई जाती है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु के साथ देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है और उनके योग में जाने को उत्सव के रुप में मनाया जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी पर फिर से प्रभु जागृत होते हैं, हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। इस साल देवशयनी एकादशी 17 जुलाई को है। यह पर्व भक्ति साधना के लिए समर्पित है। 


चातुर्मास से संबंधित नियम 

देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक का समय चातुर्मास होता है। आमतौर पर यह समय चार महीने का होता है, इसलिए इसे चातुर्मास कहा जाता है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी या हरिशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से श्री हरि शयन में चले जाते हैं और इसी के साथ आरंभ होते हैं कुछ नियम 

इस बीच सृष्टि के पालन का दायित्व महादेव पर होता है। इस समय शिव पूजन विशेष माना गया है। इसके बाद कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी पर उनका शयन काल समाप्त होता है और सृष्टि के पालन का दायित्व संभाल लेते हैं। ऎसे में इस समय पर कुछ मांगलिक कार्य जैसे विवाह, सगाई इत्यादि पर सोक लग जाती है। 

चातुर्मास आमतौर पर चार महीने का होता है, इसलिए इसे चातुर्मास कहा जाता है। चातुर्मास में शुभ कार्य वर्जित होते हैं साथ ही शास्त्रों में कुछ नियमों का पालन करने की बात कही गई है। शास्त्रों में वर्णित है कि देवशयनी एकादशी तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु क्षीर सागर में विश्राम या शयन के लिए चले जाते हैं, इसलिए देवशयनी एकादशी तिथि से चातुर्मास प्रारंभ हो जाता है।

चातुर्मास में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इसी के साथ इस समय उपनयन, गृह प्रवेश, वाहन क्रय समेत सभी शुभ कार्य वर्जित होते हैं।  

यदि आप इससे संबंधित अधिक जानकारी चाहते हैं, तो हमारे ज्योतिषाचार्यों से संपर्क करें।
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