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Home ›   Blogs Hindi ›   Budhaditya Yog: How Budhaditya Yog is formed in the horoscope and when does it give results

Budhaditya Yog: जानिए बुधादित्य योग कुंडली में कैसे बनता है और कब देता फल

Acharya RajRani Updated 15 Jun 2024 10:53 AM IST
बुधादित्य योग
बुधादित्य योग - फोटो : myjyotish

खास बातें

बुधादित्य एक शुभ योग है जो जब भी किसी जातक की कुंडली या गोचर में बनता है तो शुभ फल देता है। यह बुध और सूर्य के युति योग से बनने वाला एक खास योग है।
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Budhaditya Yog Effects बुधादित्य एक शुभ योग है जो जब भी किसी जातक की कुंडली या गोचर में बनता है तो शुभ फल देता है। यह बुध और सूर्य के युति योग से बनने वाला एक खास योग है। 

Astrology Yog ज्योतिष अनुसार हजार से अधिक योगों की अवधारण निर्धारित की गई है। कुछ शुभ योग हैं तो कुछ अशुभ योग। कुंडली का एक ऎसा योग है बुधादित्य योग जो का[ही शुभ योग में स्थान पाता है। आइये जान लेते हैं यह कब और कैसे देता है अपने प्रभाव। 

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कैसे बनता है बुधादित्य योग 

ज्योतिष अनुसार कुंडली के किसी भी भाव में बुध आदित्य योग का निर्माण हो सकता है। वैदिक ज्योतिष में किसी भी भाव में बुध आदित्य योग का निर्माण अपने अलग प्रभाव देने वाला होता है। बुध और सूर्य के योग से इस योग का निर्माण होता है। जब बुध और सूर्य एक साथ किसी एक राशि भाव में होते हैं तब यह शुभ योग बनता है। इस योग का शुभ प्रभाव जातक को बुद्धि, संचार कौशल, नेतृत्व क्षमता, तर्क क्षमता, वाणी कौशल,  मान, सम्मान, सुख देता है। इसी के साथ कुछ ऐसी कई अन्य विशेषताएं प्रदान कर सकता है जो अन्य लोगों से उसे विशेष बना सकती हैं। 
 

बुधादित्य योग का ज्योतिष अनुसार फल 

ज्योतिष अनुसार बुध सूर्य के सबसे निकट ग्रहों में आता है और कई कुंडलियों में बुध और सूर्य एक साथ देखे जाते हैं। ऎसे में अधिकांश कुंडलियों में बुध आदित्य योग का निर्माण होता है, जिसके कारण इस योग के शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। इस योग द्वारा प्रदान की जाने वाली विशेषताएं कुछ विशेष जातकों में ही देखने को मिलती हैं। क्योंकि इसका प्रभाकुछ खास राशियों में अधिक होता है जैसे बुध की राशियों और मंगल और सूर्य की राशि में इसका अलग ही प्रभाव होता है। इसलिए कहा जा सकता है कि बुध आदित्य योग की परिभाषा अपने आप में पूर्ण तब है जब यह किसी खास स्थान एवं राशि में निर्मित होता है। 

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बुधादित्य योग कब होता निष्फल 

किसी कुंडली में किसी भी शुभ योग के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि उस योग को बनाने वाले सभी ग्रह कुंडली में शुभ रूप से काम करें। क्योंकि अशुभ ग्रह शुभ योग नहीं बनाते बल्कि अशुभ योग या दोष बनाते हैं। किसी कुंडली में बुधादित्य योग के निर्माण के लिए कुंडली में सूर्य और बुध दोनों का शुभ होना आवश्यक है। कुंडली में इन दोनों ग्रहों में से कोई एक या दोनों ही कमजोर हैं तो उस कुंडली में बुधादित्य योग अपना फल नहीं दे पाता है और निष्फल होता है। उदाहरण के लिए यदि किसी कुंडली में सूर्य राहु केतु के साथ हो और बुध भी साथ हो तो बुधादित्य   अनुकूल नहीं हो पाता है। इसी तरह से अगर कुंडली में बुध अशुभ है और सूर्य शुभ है तो भी सूर्य और बुध की युति है तो कुंडली में बुधादित्य योग के अनुकूल फल नहीं मिल पाते हैं। 
 

बुधादित्य से मिलने वाले प्रभाव 

कुंडली में जब बुध और सूर्य एक साथ होते हैं उसे बुधादित्य योग कहते हैं, वैदिक ज्योतिष के अनुसार आदित्य शब्द सूर्य का पर्याय है और कुंडली में बुध और सूर्य का एक साथ होना बुधादित्य योग बनाता है। ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि बुधादित्य योग लोगों पर शुभ प्रभाव डालता है। बुधादित्य योग कुंडली में जिस भाव में होता है उसे मजबूत करने का काम करता है।  
 
कुंडली में बुधादित्य योग बनने से धन, वैभव और सम्मान की प्राप्ति होती है 
बुधादित्य योग बनने से व्यक्ति अपने करियर में अच्छी सफलता मिलती है। 
बुधादित्य योग बनने से व्यक्ति वाणी और कार्यकुशलता में काफी अच्छा होता है। \

ज्योतिषाचार्यों से बात करने के लिए यहां क्लिक करें- https://www.myjyotish.com/talk-to-astrologers 
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