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Banana Tree: केले का पेड़ धार्मिक दृष्टि से बेहद शुभ, जानें पौराणिक महत्व

Nisha Thapaनिशा थापा Updated 11 Jul 2024 01:21 PM IST
केले के पेड़ का धार्मिक महत्व
केले के पेड़ का धार्मिक महत्व - फोटो : My Jyotish

खास बातें

Banana Tree: केले का पेड़ धार्मिक दृष्टि से काफी शुभ माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि केले के पेड़ की पूजा का प्रचलन ऋषि दुर्वासा द्वारा अपनी पत्नि को दिए गए श्राप दिया से हुआ था। तो आइए जानते हैं केले के पेड़ का धार्मिक महत्व क्या है।
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Banana Tree: केले के पेड़ को धार्मिक दृष्टि से काफी शुभ माना गया है और इसकी पूजा भी की जाती है। आपने देखा होगा भारतीय संस्कृति के लोग शादी- विवाह जैसे शुभ कार्यों में मंडप में केले का पेड़ जरूर रखते हैं, क्योंकि केले के पेड़ में भगवान का वास माना गया है, इसी प्रकार से गुरुवार के दिन केले के पेड़ की विशेष रूप से पूजा की जाती है। तो इस लेख के जरिए जान लेते हैं कि केले के पेड़ का क्या महत्व है।
 

केले के पेड़ का धार्मिक महत्व

 

केले का पेड़ भगवान विष्णु का स्वरूप मान गया है और इसकी पूजा भी उन्हीं के स्वरूप में की जाती है। इसलिए केले का पेड़ बेहद शुभ होता है। गृह प्रवेश, नामकरण, शादी-विवाह जैसे अनुष्ठान वाले कार्यों में केले के पेड़ को रखा जाता है और उसकी पूजा की जाती है। कहा जाता है कि केले का पेड़ घर में रखने से सुख -समृद्धि के द्वार खुलते हैं और घर में खुशहाली आती है। 

इसके अलावा भी आपने देखा होगा कि भगवान विष्णु की सत्यनारायण व्रत कथा के दौरान भी जब मंडप सजाया जाता है, तो केले की पेड़ का ही उपयोग किया जाता है। केले के पेड़ के साथ-साथ केले के पत्तों को भी बेहद शुभ माना गया है, केले के पत्तों का इस्तेमाल खाना खाने के लिए भी किया जाता है। पहले केले के पत्तों में भोजन करने की परंपरा पूरे भारतवर्ष में चलती थी, लेकिन अब आप यह अधिकतर दक्षिण भारत में ही देखने को मिलता है और आज भी शादी-विवाह जैसे बड़े समारोह में लोग केले के पत्तों में ही भोजन करते हैं। इसके अलावा जब भगवान को भोग लगाया जाता है तब भी केले के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है। 
 

ऋषिु दुर्वासा से जुड़ी है केले के पेड़ की कहानी

 

कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि एक बार ऋषि दुर्वासा ने अपनी पत्नी को श्राप दे दिया था। दरअसल एक बार ऋषि ने अपनी पत्नी कंदली को कहा कि उन्हें सुबह ब्रह्म मुहूर्त में  जगा दें, लेकिन उनकी पत्नी ऋषि को ब्रह्म मुहूर्त में जगा नहीं  पाईं और जब ऋषि की आंख खुली तो दिन चढ़ चुका था, तब कहा जाता है कि ऋषि दुर्वासा अपनी पत्नी कंदली पर बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने क्रोध में और अपनी पत्नी को भस्म होने का श्राप दे दिया और ऋषि के श्राप के बाद तुरंत ही कंदली राख में बदल गईं। जब कंदली के पिता ऋषि अंबरीश ने अपनी पुत्री को राख बना हुआ देखा तो यह बहुत दुखी हुए, तब दुर्वासा ऋषि को भी अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने अपनी पत्नी की राख को केले के पेड़ में बदल दिया और उन्हें वरदान दिया कि अब से हर एक शुभ कार्य, अनुष्ठान और पूजा में आप हिस्सा बनेंगी। इस प्रकार से केले के पेड़ का जन्म हुआ, इसलिए केले के पेड़ के फल को कदली फल भी कहा जाता है, जो कि ऋषि की पत्नी के नाम पर केले के फल का नाम पड़ा।

तो, इस प्रकार से केले के पेड़ का यह धार्मिक महत्व है। यदि आप इससे संबंधित अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमारे ज्योतिषाचार्यों से संपर्क करें।
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