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जीवन में उत्पन्न होने वाली घटनाओं के कारक ग्रह कौन होते है ?

Myjyotish Expert Updated 13 Oct 2020 04:47 PM IST
Kundali
Kundali - फोटो : Myjyotish

शनि
शनि का प्रभाव शरीर की नसों व हड्डियों पर रहता है। शनि की ख़राब स्थिति में नसों में ऑक्सीजन की कमी व हड्डियों में कैल्शियम की कमी होती जाती है।वाहन-मशीनरी से चोट लगना व चोट लगने पर हड्डियों में फ्रैक्चर होना आम बात है। यदि पैरों में बार-बार चोट लगे व हड्डी टूट जाए तो यह शनि की खराब स्थिति को दर्शाता है।

उपाय
शनि की शांति के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें। मद्यपान और माँसाहार से पूर्ण परहेज करें। नौकरों-कर्मचारियों से अच्छा व्यवहार करें। शनि न्याय का ग्रह है इसलिए न्याय का रास्ता अपनाएँ, परिवार से विशेषत: स्त्रियों से संबंध मधुर रखें।

राहु
राहु का प्रभाव दिमाग व आँखों पर रहता है। कमर से ऊपरी हिस्से पर ग्रह विशेष प्रभाव रखता है। राहु की प्रतिकूल स्थिति जीवन में आकस्मिकता लाती है। दुर्घटनाएँ, चोट-चपेट अचानक लगती है और इससे मनोविकार, अंधापन, लकवा आदि लग्न राहु के लक्षण हैं। पानी, भूत-बाधा, टोना-टोटका आदि राहु के क्षेत्र में हैं।

उपाय
गणेश जी व सरस्वती की आराधना करें। अवसाद से दूर रहें। सामाजिक संबंध बढ़ाएँ। जीवन में रिस्क न लें। खुश रहें व किसी से बातें न छुपाएँ।
 

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मंगल
मंगल हमारे शरीर में रक्त का प्रतिनिधि है। मंगल की अशुभ स्थिति से बार-बार सिर में चोट लगती है। खेलते-दौड़ते समय गिरना आम बात है और इस स्थिति में छोटी से छोटी चोट से भी रक्त स्राव होता जाता है। रक्त संबंधी बीमारियाँ, मासिक धर्म में अत्यधिक रक्त स्राव भी खराब मंगल के लक्षण हैं। अस्त्र-शस्त्रों से दुर्घटना होना, आक्रमण का शिकार होना इसके दुष्प्रभाव है।

उपाय
मंगलवार का व्रत करें, मसूर की दाल का दान करें। उग्रता पर नियंत्रण रखें। मित्रों की संख्या बढ़ाएँ। मद्यपान व माँसाहार से परहेज़ करें। अपनी ऊर्जा को रचनात्मक दिशा दें और उसे सकारात्मक रखें ।

कब होती है परेशानी 
जब-जब इन ग्रहों की महादशा, अंतर्दशा या प्रत्यंतर दशा आएगी, तब-तब संबंधित दुर्घटनाओं के योग बनते हैं। इसके अलावा गोचर में इन ग्रहों के अशुभ स्थानों पर जाने पर, ऐसे कुयोग बनते हैं अत: इस समय का ध्यान रखकर संबंधित उपाय करना बहुत आवश्यक है।

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