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माता सीता का दिया श्राप जो आज भी यह पांचो झेल रहे हैं

Myjyotish Expert Updated 14 Apr 2021 10:08 AM IST
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Astrology - फोटो : Myjyotish

हिन्दू धर्म में हम सभी रामायण की कथाओं से अच्छी तरह वंचित हैं। माता सीता, श्री राम और लक्ष्मण जी के वनवास काटने की कहानियां भी हम बचपन से सुनते आ रहे हैं। पर आज हम उन्ही में से एक ऐसी घटना के बारे में बताएंगे जब माता सीता क्रोधित होकर पांच लोगों को श्राप दे दिया था जिसमें गाय, कौआ, तुलसी, फल्गु नदी और ब्राह्मण शामिल है।

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माता सीता, श्री राम और लक्ष्मण जी के वनवास काटने के दौरान राजा दशरथ जी की मृत्यु हो जाती है। उस दौरान उन सभी को अपने पिता के लिए पिंड दान करना था। पिंड दान हमेशा किसी पवत्र नदी के पास जाकर होता है। इस दौरान वह तीनों गया के फल्गु नदी के तट पर पहुंचे। जब वह नदी के पास पहुंचे तो श्री राम ने पंडित से पिंड दान की सामग्री के लिए पूछा। इसके बाद लक्षमण जी पास के गांव में सामग्री लाने निकल पड़े। वक़्त बीतता गया पर लक्ष्मण जी की कोई खोज खबर नहीं थी। तब श्री राम ने निर्णय लिया कि वह खुद उनकी तलाश करने जाएंगे।

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पूजा की शुभ मुहूर्त निकली जा रही थी। समय काफी बीतता गया पर वह दोनों की कोई खोज खबर नहीं थी। इस पर माता सीता ने निर्णय लिया कि उनके पास जो भी सामग्री मौजूद है उसी से वह पिंड दान करेंगी। विधिपूर्वक माता सीता ने पूजा समाप्त की। यह पूजा सफल हो गयी और राजा दशरथ ने भी इसे स्वीकार कर लिया था। यह देख मां सीता प्रसन्न हुईं और उन्होंने फल्गु नदी, कौआ, गाय, तुलसी, ब्राह्मण और वट वृक्ष को इस बात का साक्षी बनने को कहा। पर जब श्री राम और लक्ष्मण जी वापस लौट कर आएं तो उन्होंने पूजा के वक़्त हुई साड़ी कहानियों का ज़िक्र किया और उन सभी ने अनुरोध किया कि वह सच्चाई बताएं। पर श्री राम के क्रोध को देख कर किसी ने भी कुछ बताने के हिम्मत नहीं की। केवल वट वृक्ष ने सारी सच्चाई बताई।
 
इससे माता सीता को दुःख हुआ और सभी को श्राप दिया। फल्गु नदी को उन्होंने श्राप दिया कि वह सिर्फ नाम की नदी होगी, उसमे कभी भी पानी नहीं होगा। आज भी यह सुखी पड़ी है। गाय को श्राप दिया कि उसके पूरी शरीर की पूजा कभी नहीं की जाएगी। यहां वहां भटकने का भी श्राप दिया। उन्होंने पंडित को भी श्राप दिया कि वह लाभ संतुष्ट नहीं रहेंगे। तुलसी जो श्राप दिया कि वह गया की मिट्टी में कभी नहीं खिलेंगे। कौवा को लड़-झगड़ कर खाने का श्राप दिया था। वहीं वट वृक्ष को लब्मी आयु और दूसरों को छाया देने का आशीर्वाद दिया।

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