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कुंडली में स्थित गजकेसरी योग क्यों माना जाता है ख़ास ?

Myjyotish Expert Updated 07 Apr 2021 12:26 PM IST
Astrology
Astrology - फोटो : Myjyotish
ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे शुभ योग होते हैं जो यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में हों तो वह सफ़लता के शिखर को छूता है। उसे धन-सम्पदा, स्त्री सुख, सन्तान सुख, घर, वाहन, पद-प्रतिष्ठा, सेवक सभी प्राप्त होते हैं। ऐसा ही एक अत्यन्त शुभ योग है-गजकेसरी योग।

गजकेसरी योग जिस व्यक्ति की कुंडली में होता है, वह जातक जीवन के किसी न किसी क्षेत्र में विशेष सफलता अर्जित करता है। वह धार्मिक, परोपकारी, आज्ञा कारक और दूसरों के हित की परवाह करने वाला होता है और उसके सामने बड़े-बड़े शत्रु भी धराशाई हो जाते हैं। कुंडली में बनने वाले कुछ महान योगों में से एक गज केसरी योग जिस व्यक्ति की कुंडली में निर्मित होता है, वह उसकी शक्ति, बुद्धिमत्ता, कार्यकुशलता और क्षमता में वृद्धि करता है। ऐसा व्यक्ति उच्च पदाधिकारी भी हो सकता है और सरकारी क्षेत्र में भी सफलता अर्जित कर सकता है।

गजकेसरी योग क्या है 

वैदिक ज्योतिष के ग्रंथों में गजकेसरी योग की बड़ी महिमा बताई गई है। यह एक अत्यंत ही शुभ योग है। जातक परिजात भी गज केसरी योग के महत्व को बताता है। गजकेसरी योग में गज और केसरी के नाम को प्रयोग किया गया है। गज अर्थात् हाथी और केसरी अर्थात् सिंह, ये दोनों ही सबसे शक्तिशाली माने जाते हैं और अपने स्वभाव अनुसार विभिन्न प्रकार की शक्तियां और विशेषताएँ अपने अंदर समाहित रखते हैं।

शास्त्रों के अनुसार गज को गणेशजी का प्रतीक भी माना जाता है जो कि बुद्धि के देवता हैं। गज यानि हाथी की अपारशक्ति अभिमान से रहित होती है और सिंह यानि शेर अपनी दूरदर्शिता और कुशल बुद्धि के साथ-साथ अपने मज़बूती, फ्रुर्ती और कुशल नेतृत्व क्षमता तथा साहस के लिए जाना जाता है। इसी के अनुसार जब किसी व्यक्ति की कुंडली में गजकेसरी योग बनता है तो वह व्यक्ति इन सभी गुणों से
परिपूर्ण होकर अपनी सफलता का परचम लहराता है।

बृहस्पति को धन का कारक ग्रह भी कहा गया है, इसलिए गजकेसरी योग निर्मित होने पर व्यक्ति को प्रबल धन लाभ के योग बनते हैं और उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो जाती है। वह व्यक्ति जीवन में उच्च पद प्राप्त करता है तथा कुशल वक्ता होता है तथा भाषण कला में निपुण होता है। वह महत्वाकांक्षी होता है और धन प्राप्ति के लिए प्रयास करता है।

 गज केसरी योग का निर्माण :-

महर्षि पाराशर द्वारा रचित बृहत पाराशर होरा शास्त्र का यह श्लोक गजकेसरी योग पर प्रकाश डालता है :
केन्द्रे देवगुरौ लगनाच्चन्द्राद्वा । 
शुभदृग्युते नीचास्तारिगृहैर्हीने योगोऽयं गजकेसरी।।३।।
गजकेसरीसञ्जातस्तेजस्वी धनवान् भवेत्।
मेधावी गुणसम्पन्नो राजप्रियकरो नरः।।४।।

यदि बृहस्पति चंद्रमा से केंद्र भाव में अर्थात् प्रथम भाव, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव अथवा दशम भाव में स्थित हो और शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो गजकेसरी योग का निर्माण होता है। एक कुशल और मजबूत गजकेसरी योग के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि बृहस्पति और चंद्रमा में से कोई भी ग्रह अस्त ना हो, ना ही नीच राशि में हो और ना ही किसी शत्रु राशि में हो क्योंकि यदि ऐसा होता है तो यह है योग बनने के बावजूद भी अच्छे फल देने में सक्षम नहीं होता।

इसके अलावा कुंडली के अष्टम भाव, द्वादश भाव और षष्ठ भाव में बनने वाला गजकेसरी योग भी अक्सर कमजोर फल देता है। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि गजकेसरी योग बनने के लिए बृहस्पति का चंद्रमा से केंद्र में होना भी आवश्यक है और उस पर शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो अधिक अच्छा होता है। आमतौर पर ऐसा अनेक कुंडलियों में संभव हो सकता है, जिनमें गजकेसरी योग का निर्माण हो रहा हो

लेकिन केवल यह योग बनने मात्र से इसके अच्छे फल नहीं मिल सकते बल्कि अन्य स्थितियां और योग बनाने वाले ग्रह भी मजबूत स्थिति में होने भी आवश्यक हैं।

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 जीवन में अपार सफलता देता है गजकेसरी योग :-

1. अगर गजकेसरी योग मंगल के प्रतिनिधित्व वाली राशियों मेष अथवा वृश्चिक राशि में बनता है तो यह योग व्यक्ति को साहस, सामर्थ्य, शक्ति और शत्रुओं का दमन करने में परिपूर्ण बनाता है। ऐसा व्यक्ति जीवन में उच्च सरकारी पदों पर पहुंचने में सक्षम होता है और रक्षा विभाग, आर्मी, नेवी, एयर फोर्स, पुलिस या इसी तरह के रक्षात्मक कार्यों में लगे संगठनों में उच्च अधिकारी बन सकता है। 

ऐसा व्यक्ति एक मजबूत व्यवसायी अथवा व्यापारी बन सकता है। इस योग में बनने वाला गजकेसरी योग व्यक्ति को एक सफल डॉक्टर या मशीनों और दवाइयों अथवा केमिकल के काम में सफलता देता है और हॉस्पिटल आदि से जोड़कर या उपरोक्त कार्यों में से किसी कार्य को करके व्यक्ति धनवान बन जाता है।

 2. यदि शुक्र की राशि वृषभ अथवा तुला में गजकेसरी योग का निर्माण होता है तो इस योग के कारण व्यक्ति के अंदर कलात्मकता की बढ़ोतरी होती है। उसमें अभिनय क्षमता आती है और वह एक अच्छा अभिनेता बन सकता है। उसके अंदर कौशल और कला होती है। उसको भू संपत्ति का अत्यंत लाभ मिलता है और जीवन में समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है। ऐसे व्यक्ति कृषि से संबंधित कार्य अथवा नृत्य, मॉडलिंग, गायन, अभिनय, चित्रकला संगीत और फिल्म डायरेक्शन या फिल्म निर्माण से जुड़े कार्यों से जुड़कर जीवन में सफलता अर्जित करता है और वह लोकप्रिय भी होता है।

 3.  यदि गजकेसरी योग बुध ग्रह की राशियों अर्थात् मिथुन या कन्या में निर्मित हो रहा हो तो यह व्यक्ति को अत्यंत ही विद्वान बनाता है। उसकी बुद्धि तेज होती है और उसकी स्मरण शक्ति भी कमाल की होती है। ऐसा व्यक्ति बहुत ज्ञानी होता है और किसी बड़े शैक्षिक संस्थान का मुखिया भी बन सकता है। उसके पास अतुलनीय धन और संपदा होती है तथा व्यापार से भी वह अच्छा नाम और पैसा कमा सकता है। अक्सर ऐसे लोग स्टॉक मार्केट में ऊंचा नाम कमाते हैं और किसी भी वित्तीय संस्थान या इंश्योरेंस सेक्टर में काम करते हुए तरक्की करते हैं।

 4. गजकेसरी योग यदि चंद्रमा की कर्क राशि अथवा सूर्य की सिंह राशि में निर्मित हो रहा हो तो ऐसे व्यक्ति को जीवन में उच्चतम पद और सामाजिक स्तर की प्राप्ति होती है। वह लोगों का नेतृत्व करने में सक्षम होता है और अपनी शान को महत्व देता है। ऐसा व्यक्ति सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करता है। उसके पास अनेक प्रकार के महत्वपूर्ण साजो समान और अनेकों रत्न हो सकते हैं। आभूषणों का उसे विशेष स्नेह होता है। ऐसा व्यक्ति कोई बड़ा मंत्री अथवा सांसद बन सकता है या कोई राजदूत या किसी एस्टेट का मालिक बन सकता है। ऐसे लोग जमींदारी के काम में भी सफल होते हैं।

 5.  यदि गजकेसरी योग का निर्माण बृहस्पति ग्रह से संबंधित राशियों अर्थात् धनु अथवा मीन राशि में हो रहा हो तो यह योग व्यक्ति को उच्च नेतृत्व क्षमता, साहस, मान – सम्मान और ज्ञान प्रदान करता है। ऐसा व्यक्ति निर्णय लेने में देर नहीं लगाता और दूरदर्शी सोच का स्वामी होता है। ऐसे व्यक्ति का सामाजिक दायरा काफी बड़ा होता है और उसमें समाज के गणमान्य और रसूखदार व्यक्ति शामिल होते हैं। ऐसे व्यक्ति के पास अकूत धन होता है और राजनीति के क्षेत्र में भी वह व्यक्ति नाम कमाता है। वह व्यक्ति कोई बड़ा मंत्री अथवा राजनेता बन सकता है या बड़ा नौकरशाह भी बन सकता है। व्यक्ति का जीवन प्रभावशाली होता है और उसके बड़े-बड़े लोगों से संबंध होते हैं।

 6.  यदि शनि ग्रह के स्वामित्व वाली मकर अथवा कुंभ राशियों से गजकेसरी योग का संबंध बन रहा हो तो ऐसे योग वाला व्यक्ति अतुलित धन का स्वामी होता है और जीवन में आर्थिक समृद्धि की कोई कमी नहीं रहती। ऐसा व्यक्ति कठोर परिश्रम करके स्वयं को मजबूत बनाता है और जीवन में सभी सुख सुविधाओं को प्राप्त करता है। ऐसा व्यक्ति स्वावलंबी होता है और अपनी मेहनत के बल पर अपने भाग्य का निर्माण करता है। ऐसा व्यक्ति खदानों, तेल, बिल्डिंग निर्माण, रियल एस्टेट से संबंधित कामों में उच्च सफलता प्राप्त कर सकता है।

गजकेसरी योग के प्रभाव अनेक रूपों में अनेक प्रकार से प्राप्त हो सकते हैं :-

1.  यदि कुंडली के लग्न अर्थात् प्रथम भाव में यह योग बन रहा हो तो जातक कोई राजनेता या अभिनेता भी बन सकता है और यह जनता के बीच काफी लोकप्रिय होते हैं। उनका रहन-सहन काफी अच्छा होता है और यह योग जातक को अच्छी बुद्धि देता है जिससे वह ईश्वर में आस्था रखता है और गलत रास्ते पर नहीं जाता।

2.  यदि गजकेसरी योग का संबंध कुंडली के दूसरे भाव से बन रहा हो तो जातक का जन्म किसी ऐसे घर में होता है जहां धन आदि की कोई कमी नहीं होती और समस्त सुविधाएं मौजूद होती हैं। ऐसा व्यक्ति अपने परिवार और कुल का नाम रोशन करता है।

 3.  कुंडली का तीसरा भाव यदि गजकेसरी योग से संबंध बना रहा हो तो ऐसे में व्यक्ति पराक्रमी होता है और अपने भुजबल से अपना नाम कमाता है। ऐसे व्यक्ति अपने भाई बहनों को भी सुख देते हैं और उनकी भलाई के लिए कुछ ना कुछ कार्य अवश्य करते हैं। अपने जीवन पर ग्रहों और योगों के प्रभाव के बारे में अधिक जानें व्यक्तिगत बृहत् कुंडली के साथ।

 4. यदि गजकेसरी योग का संबंध कुंडली के चौथे भाव से बन रहा हो तो व्यक्ति को माता का असीम सुख मिलता है और माता के सहयोग से व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ता है। उसे चल और अचल संपत्ति का प्रबल लाभ मिलता है और उनसे सुखी होता है तथा उसका घर बहुत ही सुंदर हो सकता है। ऐसा व्यक्ति जीवन में सुखों से परिपूर्ण होता है और दूसरों की भलाई सोचता है।

 5.  कुंडली के पंचम भाव से गजकेसरी योग का निर्माण होना उत्तम संतान का योग भी बनाता है और व्यक्ति अपनी बुद्धि, विवेक और ज्ञान के बल पर जीवन में यश कमाता है। ऐसा व्यक्ति बुद्धिमान होता है और निरंतर लोगों को नई सीख देता है। अध्यापक, प्राध्यापक, टीचर, वैज्ञानिक, आविष्कार करने वाला भी हो सकता है और कुशल अभिनेता और मार्गदर्शक भी बन सकता है। ऐसे व्यक्ति की संतान भी जीवन में उत्तरोत्तर वृद्धि करती है।

 6. कुंडली का छठा भाव शत्रुओं का और रोग वृद्धि का भाव होता है। यदि छठा भाव गजकेसरी योग के निर्माण में संबंध बना रहा हो तो ऐसी स्थिति में बजने वाला गजकेसरी योग ज्यादा मजबूत नहीं होता। अक्सर ऐसे लोगों को अपने शत्रुओं का सामना करना पड़ता है। हालांकि समय के साथ शत्रु पराजित भी होते हैं लेकिन व्यक्ति को मानसिक रूप से तनाव बना रहता है और स्वास्थ्य पर भी कष्ट बने रहते हैं। ऐसे व्यक्ति के शत्रु बढ़ सकते हैं और खर्चों में भी अधिकता होती हैं तथा माता के सुख में भी कमी आ सकती है। यह कुंडली का अच्छा भाव नहीं माना जाता इसलिए इसमें शुभ ग्रह बृहस्पति और चंद्रमा की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं होती।

 7. सप्तम भाव में बनने वाला गजकेसरी योग उत्तम जीवन साथी प्रदान करता है। ऐसा जीवन साथी जो आपके कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाला हो और आपको सही सलाह देने वाला होता है। वह स्वयं प्रतिष्ठित परिवार से हो सकता है और जीवन में स्वयं भी उच्च पदस्थ हो सकता है। ऐसे व्यक्ति का मान सम्मान भी होता है और जीवन साथी बुराई से दूर सुशील होता है और दांपत्य जीवन में भी प्रबल सुख होता है।

 8.  कुंडली का अष्टम भाव अचानक से होने वाली घटनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। यदि गजकेसरी योग का संबंध इस भाव से बन जाए तो गजकेसरी योग के प्रभाव में कमी आ जाती है। हालांकि यह योग व्यक्ति को गूढ़ विद्याओं में पारंगत बनाता है और वह आध्यात्मिक सोच विकसित करता है। बड़े बड़े ज्ञानी पुरुष जो अध्यात्म के शिखर पर हैं अथवा साधु संत या तांत्रिकों की कुंडली में अष्टम भाव मजबूत होता है। ऐसे में गजकेसरी योग भी मदद करता है। इस भाव का गजकेसरी योग व्यक्ति को अनपेक्षित धन प्रदान करता है और गुप्त धन की ओर भी इशारा करता है लेकिन जीवन में समस्याएं भी आती रहती हैं।

 9.  नवम भाव को भाग्य स्थान भी कहा गया है। इस भाव से संबंध रखने वाला गजकेसरी योग व्यक्ति के भाग्य में कई गुना बढ़ोतरी कर देता है और व्यक्ति को कर्म से ज्यादा भाग्य से फायदा मिलता है। ऐसा व्यक्ति धार्मिक होता है और समाज में अच्छे कार्य करने वाला होता है। समाज के परोपकार के कार्यों से उसे जीवन में मान-सम्मान और धन संपदा की प्राप्ति होती है। वह बहुत भाग्यशाली होता है और उस पर विशेष ईश्वर कृपा रहती है। ऐसा व्यक्ति लंबी यात्राओं से सुख उठाता है।

 10.  दशम भाव मजबूत केंद्र भाव है जो आपके व्यवसाय का भाव भी है। यदि इस भाव में व्यक्ति के गजकेसरी योग का संबंध बन रहा हो तो व्यक्ति अपने करियर में ऊँचाइयों पर पहुंच जाता है। उससे सभी लोग प्रभावित होते हैं और उसकी प्रशंसा करते हैं। बड़े-बड़े लोग उस से सलाह लेते हैं और वह कोई राज मंत्री, नेता, अभिनेता, सांसद और उच्च पद पर प्रतिष्ठित व्यक्ति हो सकता है। व्यक्ति जीवन में कर्म प्रधान होता है और उसी के बल पर तरक्की प्राप्त करता है।

 11.  यदि गजकेसरी योग का संबंध कुंडली के एकादश भाव से हो जाए तो व्यक्ति की आमदनी में कई गुना बढ़ोतरी हो जाती है। उसके पास एक से अधिक माध्यमों से धन की प्राप्ति के योग बनते हैं और ऐसा व्यक्ति धन के पीछे ज्यादा समय नहीं लगाता बल्कि धन स्वयं उसके पास आ जाता है। अक्सर ऐसे लोग ब्याज पर पैसा देकर धन कमाते हैं और शारीरिक मेहनत कम करके भी उन्हें अतुलनीय धन संपदा प्राप्त होती है। जीवन में उनकी अधिकांश महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति होती है।

12. यदि गजकेसरी योग का संबंध कुंडली के बारहवें भाव से हो तो यहां उपस्थित गजकेसरी योग व्यक्ति को धर्म-कर्म के कामों में आगे बढ़ा देता है लेकिन ऐसा व्यक्ति इन सभी कार्यों पर बढ़-चढ़कर पैसा भी खर्च करता है और अक्सर जन्म स्थान से दूर रहकर ही तरक्की प्राप्त कर पाता है। यदा-कदा शत्रु भी परेशान कर सकते हैं लेकिन इस योग के प्रभाव से व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से उन्नत बनता है।काम्या वैदिक एस्ट्रो 

इस प्रकार गजकेसरी योग विभिन्न प्रकार से हमारे जीवन को प्रभावित करता है और जिस भाव और ग्रह से संबंधित होता है उसके फलों को बढ़ाने की भी क्षमता रखता है।

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