myjyotish

9873405862

   whatsapp

8595527218

Whatsup
  • Login

  • Cart

  • wallet

    Wallet

Home ›   Blogs Hindi ›   Ashtami shradh paksha pooja blessings

Shradh Puja: अष्टमी श्राद्ध के दिन करें पितरों का ध्यान, होंगी समस्त इच्छाएं पूर्ण

Myjyotish Expert Updated 09 Sep 2020 05:48 PM IST
अष्टमी श्राद्ध
अष्टमी श्राद्ध - फोटो : Myjyotish
पितरों के प्रति कृत्यागत दर्शान का उन्हें याद करने का हिंदु धर्म व अन्य धर्मों में एक कर्म किया जाता हैं जिसे श्राद्ध कहते हैं। आश्विन कृष्ण पक्ष के 16 दिनों के समय में यह किया जाता हैं । श्राद्ध की मान्यताए बहुत हैं , इन दिनों लोग अपने पितरों को याद कर उन्हें पूजते हैं। गरुण पुराण में भी इसका महत्व समझाया गया हैं, कहा गया है की पितरों को मृत्युलोक में जगह नहीं मिलती जबतक उनका तर्पण न किया जाए । कहा जाता है कि पितृ प्रसन्न न हो तो पितृ दोष का श्राप मिलता हैं । ग्रंथों के अनुसार भगवान से पहले पितरों की पूजा आवश्यक हैं । वह प्रसन्न रहते है तभी भगवान भी प्रसन्न रहते हैं । यह भी कहा जाता है कि इन दिनों सभी पूर्वज पृथ्वी पर सुक्ष्म रूप में आकर उनके लिए किए गए तर्पण को ग्रहण करते हैं।

क्या आपको चाहिए अनुभवी एक्सपर्ट की सलाह ?

SUBMIT


घर बैठें श्राद्ध माह में कराएं विशेष पूजा, मिलेगा समस्त पूर्वजों का आशीर्वाद 

श्राद्ध में हर दिन अलग-अलग श्राद्ध करनें का विधान हैं

अष्टमी श्राद्ध कर्म में आठ ब्राह्मणों को भोजन कराने का विधान है। श्राद्ध में गंगाजल, कच्चा दूध, तिल, जौ व मिश्री मिश्रित जल की जलांजलि दें उसके उपरांत पितृ पूजन करें। पितृगण के निमित्त, गौघृत का दीप करें, सुगंधित धूप करें, लाल फूल, लाल चंदन, तिल व तुलसी पत्ता समर्पित करें। जौ के आटे के पिंड समर्पित करें। फिर उनके नाम का नैवेद्य रखें। कुशासन पर बैठाकर पितृ के निमित्त भगवान विष्णु के गोविंद स्वरूप का ध्यान करते हुए गीता के आठवें अध्याय का पाठ करें व इस विशेष पितृ मंत्र का यथा संभव जाप करें। इसके उपरांत लौकी की खीर, पालक, पूड़ी, पालक की सब्ज़ी, मूंग दाल, हरे फल, लौंग-इलायची व मिश्री अर्पित करें। भोजन के बाद ब्राह्मणों को वस्त्र, मिश्री व दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें।

इस पितृ पक्ष गया में कराएं श्राद्ध पूजा, मिलेगी पितृ दोषों से मुक्ति : 01 सितम्बर - 17 सितम्बर 2020

कौन होते हैं पितृ ?

परिवार के वह लोग जिनकी मृत्यु हो चुकी हैं , विवाहिता - अविवाहिता, बच्चे-बूढ़े , स्त्री-पुरुष जो भी हो उन्हें पितृ कहते हैं। घर में सुख शांति भी तभी होतीं है जब पितरों की आत्मा को शांति मिलती है । पितृ घर की खुशहाली देखते है और बिगड़ते काम भी बनाते है । अगर उनकी अनदेखी की जाए तो वह रुष्ट भी हो जाते है और बनते काम भी बिगड़ जाते हैं । 

यह भी पढ़े :-  

Shradh 2020 Dates- जानें श्राद्ध प्रारम्भ तिथि एवं महत्व 


श्राद्ध पूजा 2020 : क्या है विशेष, जानें मान्यता

श्राद्ध 2020 : कब से प्रारम्भ हो रहें है श्राद्ध, जानें महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • 100% Authentic
  • Payment Protection
  • Privacy Protection
  • Help & Support


फ्री टूल्स

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms and Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
X