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Home ›   Blogs Hindi ›   Angarki Chaturthi 2024: Today is Angarak Chaturthi of Ashadh month

Angarki Chaturthi 2024 : आज है आषाढ़ माह की अंगारक चतुर्थी, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त व पूजा विधि

Acharya RajRani Updated 25 Jun 2024 09:52 AM IST
अंगारकी चतुर्थी
अंगारकी चतुर्थी - फोटो : myjyotish

खास बातें

Angarki Sankashti Chaturthi 2024 :  अंगारकी चतुर्थी को एक बेहद शुभ संयोग माना गया है, अंगारक गणेश चतुर्थी के दिन किया गया पूजन मंगल शांति के साथ गणपति की कृपा प्रदान करता है.

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Angarki Sankashti Chaturthi 2024 :  अंगारकी चतुर्थी को एक बेहद शुभ संयोग माना गया है, अंगारक गणेश चतुर्थी के दिन किया गया पूजन मंगल शांति के साथ गणपति की कृपा प्रदान करता है। आइये जान लेते हैं अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि 

Angarki Chaturthi puja : इस वर्ष आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी अंगारक चतुर्थी के रुप में मनाई जाएगी।  मंगलवार के दिन आने वाली चतुर्थी को अंगारक चतुर्थी के नाम से पूजा जाता है। इस दिन किया गया गणेश पूजन दिलाता है सुख शांति का वरदान मिलती है मंगल दोष से मुक्ति। 

 

अंगारक गणेश चतुर्थी 2024 पूजा मुहूर्त 

आषाढ़ माह के आने वाली श्री गणेश चतुर्थी का नाम अंगारकी इसलिए पड़ा है क्योंकि यह मंगलवार को पड़ रही है। इस चतुर्थी पर व्रत रखने से कर्ज से मुक्ति मिलती है, मंगल दोष शांत होते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार, भगवान श्री गणेश को प्रसन्न करने के लिए हर माह की चतुर्थी का व्रत किया जाता है जो चतुर्थी का व्रत रखता है उसे गणपति का आशीष प्राप्त होता है। गणेश चतुर्थी का यह व्रत अगर मंगलवार को पड़े तो इसे अंगारक गणेश चतुर्थी कहते हैं। 25 जून 2024 को यह संयोग मिल रहा है।    


अंगारकी चतुर्थी महत्व

संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है, चतुर्थी तिथि मंगलवार को है इसलिए श्री गणेश चतुर्थी के साथ-साथ मंगलवार का दिन भी है और अगर किसी भी महीने की चतुर्थी तिथि मंगलवार को पड़े तो वह अंगारकी चतुर्थी बन जाती है जिसे कर्ज से मुक्ति के लिए बहुत शुभ माना जाता है।

अंगारकी चतुर्थी शब्द अंगारक से बना है और अंगारक मंगल का एक नाम है मंगल की शुभत अपाने के लिए यह दिन बहुत शुभ होता है। साथ ही व्यक्ति की ऊर्जा और शक्ति में वृद्धि होती है, इसलिए अंगारकी वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश के साथ-साथ मंगल के उपाय करना भी बहुत लाभकारी होता है। 
 

अंगारकी गणेश चतुर्थी पूजा विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर अपने सभी काम निपटाकर स्नान करने के बाद गणपति का ध्यान करना चाहिए। एक चौकी पर साफ पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति रखनी चाहिए। गणपति को फूलों की मदद से जल चढ़ाएं। इसके बाद रोली, अक्षत और पूजा सामग्री अर्पित करनी चाहिए। इसके बाद पान के पत्ते, दूब, सुपारी, लौंग, इलायची और मिठाई अर्पित करनी चाहिए।

 नारियल और मोदक चढ़ाना बहुत अच्छा माना गया है। सभी सामग्री चढ़ाने के बाद धूप, दीप से भगवान गणेश की आरती करनी चाहिए और मंत्र का जाप करते हुए पूजन करना चाहिए। अंगारकी चतुर्थी का संयोग चतुर्थी पर पड़ रहा है, कहते हैं कि मंगलवार को पड़ने वाली चतुर्थी को अंगारकी चतुर्थी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन गणेश जी की पूजा करने से मंगल दोष से मुक्ति मिलती है।
 

अंगारकी गणेश चतुर्थी के दिन ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र  

अंगारक गणेश चतुर्थी के दिन किया गया "ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र" का पाठ करने से आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है कर्ज की समस्या नहीं रहती है। इस स्त्रोत के जाप से मिलती है हर धन संबंधी हर समस्या से मुक्ति।
 
ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र

विनियोग 
ॐ अस्य श्रीऋण-मोचन महा-गणपति-स्तोत्र-मन्त्रस्य भगवान् शुक्राचार्य ऋषिः, 
ऋण-मोचन-गणपतिः देवता, मम-ऋण-मोचनार्थं जपे विनियोगः।

ऋष्यादि-न्यास 
भगवान् शुक्राचार्य ऋषये नमः शिरसि, ऋण-मोचन-गणपति देवतायै नमः 
हृदि, मम-ऋण-मोचनार्थे जपे विनियोगाय नमः अञ्जलौ।
 
ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र
ॐ स्मरामि देव-देवेश।वक्र-तुण्डं महा-बलम्।
षडक्षरं कृपा-सिन्धु, नमामि ऋण-मुक्तये।।1।।
महा-गणपतिं देवं, महा-सत्त्वं महा-बलम्।
महा-विघ्न-हरं सौम्यं, नमामि ऋण-मुक्तये।।2।।
एकाक्षरं एक-दन्तं, एक-ब्रह्म सनातनम्।
एकमेवाद्वितीयं च, नमामि ऋण-मुक्तये।।3।।
शुक्लाम्बरं शुक्ल-वर्णं, शुक्ल-गन्धानुलेपनम्।
सर्व-शुक्ल-मयं देवं, नमामि ऋण-मुक्तये।।4।।
रक्ताम्बरं रक्त-वर्णं, रक्त-गन्धानुलेपनम्।
रक्त-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।।5।।
कृष्णाम्बरं कृष्ण-वर्णं, कृष्ण-गन्धानुलेपनम्।
कृष्ण-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।।6।।
पीताम्बरं पीत-वर्णं, पीत-गन्धानुलेपनम्।
पीत-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।।7।।
नीलाम्बरं नील-वर्णं, नील-गन्धानुलेपनम्।
नील-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।।8।।
धूम्राम्बरं धूम्र-वर्णं, धूम्र-गन्धानुलेपनम्।
धूम्र-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।।9।।
सर्वाम्बरं सर्व-वर्णं, सर्व-गन्धानुलेपनम्।
सर्व-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।।10।।
भद्र-जातं च रुपं च, पाशांकुश-धरं शुभम्।
सर्व-विघ्न-हरं देवं, नमामि ऋण-मुक्तये।।11।।

फल-श्रुति 
यः पठेत् ऋण-हरं-स्तोत्रं, प्रातः-काले सुधी नरः।
षण्मासाभ्यन्तरे चैव, ऋणच्छेदो भविष्यति

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