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Home ›   Blogs Hindi ›   4 April 2024 Tithi: Discover today's auspicious date, fasting, and festivals.

Aaj ki Tithi 4 April 2024: आज की तिथि जानें आपके लिए आज की शुभ तिथि, व्रत-उपवास

Acharya Rajrani Sharma Updated 04 Apr 2024 09:56 AM IST
Aaj ki Tithi
Aaj ki Tithi - फोटो : myjyotish

खास बातें

Aaj ki Tithi 4 April 2024: जानें आज की तिथि कौन सी है? और साथ में जानिए आज के दिन की तिथि का समय और तिथि से संबंधित कुछ विशेष बातें. वैदिक पंचांग गणना अनुसार हम आपके लिए लाए हैं आज की मुख्य तिथि 2024.
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Aaj ki Tithi 4 April 2024: जानें आज की तिथि कौन सी है? और साथ में जानिए आज के दिन की तिथि का समय और तिथि से संबंधित कुछ विशेष बातें. वैदिक पंचांग गणना अनुसार हम आपके लिए लाए हैं आज की मुख्य तिथि 2024.

इसके साथ ही आप यहां जान सकते हैं आज कौन सी तिथि है?, आज का पंचाग, आज की तिथि क्या है? ,आज देसी तिथि क्या है? आज क्या है?, आज तिथि क्या है?, हिन्दू तिथि क्या है?, आज का हिन्दू पंचाग

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हिंदू पंचांग आज की तिथि (Aaj ki Tithi)


मास पूर्णिमांत चैत्र
मास अमांत फाल्गुन
पक्ष कृष्ण
तिथि दशमी - 16:17:14 तक
वार गुरूवार (बृहस्पतिवार)
नक्षत्र श्रवण 20:12:59 तक
योग सिद्ध - 13:14:57 तक
करण विष्टि - 16:17:14 तक, बव 26:57:49 तक
विक्रम सम्वत 2081
प्रविष्टे / गत्ते 22

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Aaj ki Tithi 4 April 2024: हिंदू पंचांग के अनुसार तिथि का संबंध चंद्र गणना के अनुसार पता चलता है. चंद्र दिवस को तिथि के रुप में जाना गया है. सभी तिथियों का प्रभाव किसी न किसी रुप में हम पर पड़ता है. तिथियां जीवन में विशेष असर दिखाती हैं. वैदिक ज्योतिष गणना अनुसार तिथि अनुसार विभिन्न कार्यों को करने या न करने का नियम भी प्राप्त होता है.

एक चंद्र मास में कुल 30 चंद्र तिथियां व्याप्त होती हैं. इन 30 तिथियों में से 15 तिथियाँ कृष्ण पक्ष की होती हैं और शेष 15 शुक्ल पक्ष की होती हैं. शुक्ल पक्ष की तिथियों को प्रकाशित रुप में जाना जाता है ओर कृष्ण पक्ष की 15वीं तिथि को अंधकार पक्ष का समय कहा जाता है.

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तिथियों में अंतर का कारण

व्रत त्यौहार एवं उपवास का समय इन्हीं तिथियों को आधार पर निश्चित किया जाता है. कई बार तिथि गणना में अंतर भी देखने को मिलता है. तिथि के कम और अधिक होने का कारण भी है तिथि में अंतर होने का. तिथि क्षय और तिथि वृद्धि का होना इस तरह के अंतर दिखाता है. जिसमें चंद्रमा की गणना के चलते तथा अक्षांश एवं देशांतर के चलते तिथियों में भिन्नता भी दिखाई देती है.

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तिथियों के नाम

चंद्रमा की कला के घटने या बढ़ने के अनुसार तिथि निर्मित होती हैं. तिथियों के नाम इस प्रकार है : - प्रतिपदा (परिवा), द्वितीया (दूज), तृतीया (तीज), चतुर्थी (चौथ), पंचमी, षष्ठी (छठ), सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, (ग्यारस), द्वादशी (दुआस), त्रयोदश (तेरस), चतुर्दशी (चौदस), पूर्णिमा या अमावास्या . ये तिथियां शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में आती हैं.
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