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Home ›   Blogs Hindi ›   2024 Masik Shivaratri Vrat: Why is the monthly Shivaratri of Ashadh month special

2024 Masik Shivaratri Vrat : आषाढ़ माह की मासिक शिवरात्रि क्यों होती है खास जानें पूजा नियम

myjyotish Updated 04 Jul 2024 09:50 AM IST
मासिक शिवरात्रि
मासिक शिवरात्रि - फोटो : myjyotish

खास बातें

Masik Shivratri 2024 in July :  मासिक शिवरात्रि का पर्व भगवान शिव के पूजन हेतु खास समय होता है। आषाढ़ माह की मासिक शिवरात्रि का दिन होता है खास और इस मासिक शिवरात्रि के बाद आती है सावन शिवरात्रि।
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Masik Shivratri 2024 in July :  मासिक शिवरात्रि का पर्व भगवान शिव के पूजन हेतु खास समय होता है। आषाढ़ माह की मासिक शिवरात्रि का दिन होता है खास और इस मासिक शिवरात्रि के बाद आती है सावन शिवरात्रि।

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Masik Shivratri Date आज जुलाई माह की मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। आइये जान लेते हैं मासिक शिवरात्रि तिथि, समय, पूजा अनुष्ठान और महत्व।

मासिक शिवरात्रि 2024 पूजा मुहूर्त Masik Shivaratri Puja Muhurat

मासिक शिवरात्रि 4 जुलाई 2024 को पड़ रही है, जो भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन आषाढ़ कृष्ण चतुर्दशी का पूजन होगा बहुत खास। आषाढ़ माह के कृष्ण चतुर्दशी
तिथि का प्रारम्भ 04 जुलाई को 05:54 ए एम से होगा।

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आषाढ़, कृष्ण चतुर्दशी समाप्त होगी 5 जुलाई 04:57 ए एम पर। पूजा मुहूर्त का समय 4 जुलाई  को रात 11:24 बजे से आरंभ होकर 12:30 बजे तक रहेगा। इस शुभ समय भक्त उपवास रखते हैं, अनुष्ठान करते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं और शिव मंदिर में आशीर्वाद मांगते हैं। 
 

आषाढ़ मासिक शिवरात्रि पूजन क्यों है विशेष Why is Ashadh monthly Shivratri worship special?

आषाढ़ मासिक शिवरात्रि का दिन हिंदुओं के बीच बहुत धार्मिक महत्व रखता है। मासिक शिवरात्रि महीने में एक बार पड़ती है और भक्त उपवास रखते हैं और भगवान शिव की पूजा करते हैं। चतुर्दशी सबसे शुभ तिथियों में से एक है।

मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है। इस पवित्र दिन पर, भक्त अपार भक्ति और समर्पण के साथ भगवान शिव की पूजा करते हैं। मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ती है।  इस माह की विशेषता इस कारण से अधिक रहती है क्योंकि सावन शिवरात्रि से पहले यह शिवरात्रि आती है और इसके बाद सावन शिव पूजन का आरंभ होता है।


मासिक शिवरात्रि के दिन करें शिव चालिसा का पाठ  Shiva Chalisa

 शिव चालीसा  Shiva Chalisa

          जय गणेश गिरिजासुवन मंगल मूल सुजान ।
        कहत अयोध्यादास तुम देउ अभय वरदान ॥

जय गिरिजापति दीनदयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके । कानन कुण्डल नाग फनी के ॥

अंग गौर शिर गंग बहाये । मुण्डमाल तन क्षार लगाये ॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे । छवि को देखि नाग मन मोहे ॥

मैना मातु कि हवे दुलारी । वाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी । करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

नंदी गणेश सोहैं तहं कैसे । सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ । या छवि कौ कहि जात न काऊ ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा । तबहिं दुख प्रभु आप निवारा ॥
किया उपद्रव तारक भारी । देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

तुरत षडानन आप पठायौ । लव निमेष महं मारि गिरायौ ॥
आप जलंधर असुर संहारा । सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई । तबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥
किया तपहिं भागीरथ भारी । पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं । सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥
वेद माहि महिमा तुम गाई । अकथ अनादि भेद नहीं पाई ॥
 
प्रकटे उदधि मंथन में ज्वाला । जरत सुरासुर भए विहाला ॥
कीन्ह दया तहं करी सहाई । नीलकंठ तब नाम कहाई ॥
 
पूजन रामचंद्र जब कीन्हां । जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥
सहस कमल में हो रहे धारी । कीन्ह परीक्षा तबहिं त्रिपुरारी ॥
 
एक कमल प्रभु राखेउ जोई । कमल नयन पूजन चहं सोई ॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर । भये प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

जय जय जय अनंत अविनाशी । करत कृपा सबके घट वासी ॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावैं । भ्रमत रहौं मोहे चैन न आवैं ॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो । यह अवसर मोहि आन उबारो ॥
ले त्रिशूल शत्रुन को मारो । संकट से मोहिं आन उबारो ॥

मात पिता भ्राता सब कोई । संकट में पूछत नहिं कोई ॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी । आय हरहु मम संकट भारी ॥
 
धन निर्धन को देत सदा ही । जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥
अस्तुति केहि विधि करों तुम्हारी । क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥
 
शंकर हो संकट के नाशन । मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं । शारद नारद शीश नवावैं ॥

नमो नमो जय नमः शिवाय । सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥
जो यह पाठ करे मन लाई । ता पर होत हैं शम्भु सहाई ॥

ऋणिया जो कोई हो अधिकारी । पाठ करे सो पावन हारी ॥
पुत्र होन की इच्छा जोई । निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥
 
पण्डित त्रयोदशी को लावे । ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा । तन नहिं ताके रहै कलेशा ॥
 
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे । शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥
जन्म जन्म के पाप नसावे । अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी । जानि सकल दुख हरहु हमारी ॥
        नित नेम उठि प्रातःही पाठ करो चालीस ।
        तुम मेरी मनकामना पूर्ण करो जगदीश ॥

यदि आप इससे संबंधित अधिक जानकारी चाहते हैं, तो हमारे ज्योतिषाचार्यों से संपर्क करें।

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