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Maa Ashtalakshmi Puja Online Ashta Lakshmi Temple Hyderabad

हैदराबाद के अष्टलक्ष्मी मंदिर में धनतेरस पर कराएं माँ अष्टलक्ष्मी का धन वृद्धि पूजन - 13 नवंबर 2020 | Maa Ashtalakshmi Puja Online

By: माई ज्योतिष विशेषज्ञ

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अष्ट लक्ष्मी पूजा के शुभ फल :-   

  • धन और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 
  • अष्ट लक्ष्मी की उपासना आपको ज्ञान, साहस, पराक्रम, सफलता और शक्ति प्रदान कर सकती है।
  • देवी की पूजा से संतान सुख प्राप्त होता है।
  • अष्ट लक्ष्मी के पूजन से घर में शांति और सुख का वास होता है।

अष्ट लक्ष्मी सुख - समृद्धि की देवी मानी जाती है । धनतेरस के दिन विशेष रूप से इनका पूजन किया जाता है। भक्तों को धन और समृद्धि के अलावा कई अन्य वरदान प्राप्त करने के लिए अष्ट लक्ष्मी की पूजा की जाती है। अष्ट लक्ष्मी देवी का महत्व यह है कि वह भक्तों के प्रति दयालु होने और उन्हें साहस और ज्ञान प्रदान करने के अलावा कालातीत समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। अष्ट लक्ष्मी समृद्धि और शांति का प्रतीक है। इसलिए, अष्ट लक्ष्मी पूजा भक्तों को सफलता और समृद्धि के साथ संपन्न जीवन का आशीष प्रदान करती है। 
अष्ट लक्ष्मी देवी लक्ष्मी के आठ रूपों में से एक है। वह भक्तों द्वारा पूर्ण श्रद्धा से पूजी जाती है। उनका आशीर्वाद भक्तों को साहस, सफलता और शक्ति जैसे अन्य वरदानों के अलावा अपने जीवन को धन और समृद्धि से परिपूर्ण करने का सुनहरा अवसर देती है। 

हमारी सेवाएँ :
अनुष्ठान से पहले हमारे युगान्तरित पंडित जी द्वारा फ़ोन पर आपको संकल्प करवाया जाएगा। तथा पंडित जी द्वारा पूर्ण विधि -विधान से पूजन संपन्न किया जाएगा।

प्रसाद :

  • मिश्री और खजूर 
  • कलावा 
  • कुमकुम

जानिये हमारे पंडित जी के बारे में

धनतेरस पर माँ अष्टलक्ष्मी पूजा के लाभ

शास्त्रों के अनुसार, महालक्ष्मी के आठ रूप हैं और महालक्ष्मी के इन आठ रूपों को जीवन की नींव माना जाता है। अष्टलक्ष्मी की पूजा मनुष्य के जीवन को सफल बनाती है। अष्टलक्ष्मी पूजा से जीवन में सुख, समृद्धि आती है और धन से जुड़ा संकट दूर होता है। अष्टलक्ष्मी मंत्र के पाठ के साथ यह पूजा जीवन में धन की समस्याओं को दूर करने और अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु, व्यवसाय और धन की प्राप्ति के लिए सहायक होती है। 

अष्ट लक्ष्मी धन की देवी लक्ष्मी की आठ अभिव्यक्तियों का एक समूह है। वह धन के आठ स्रोतों को नियंत्रित करती है जो समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य, ज्ञान, शक्ति, संतान और सामर्थ हैं। प्रार्थना "श्री अष्ट लक्ष्मी स्तोत्रम" में सभी अष्ट लक्ष्मीओं को सूचीबद्ध किया गया है जिसमें सभी आठ रूपों को कमल पर विराजमान दर्शाया गया है।

अष्ट लक्ष्मी पूजा धन, अन्न, साहस, शक्ति, सफलता, संतान, भाग्य और शिक्षा जैसे 8 सांसारिक रूपों को प्राप्त करने के उद्देश्य से की जाती है। यह पूजा शुक्रवार, और पंचमी, पूर्णिमा और अमावस्या के दिन की जा सकती है। इसे किसी भी शुभ दिन भी किया जा सकता है। इस विशेष फल धनतेरस के दिन करने से प्राप्त होता है। इस दिन पूजा करने से इसके सर्वाधिक फल प्राप्त होते है। 

धन लक्ष्मी - धन की देवी धनलक्ष्मी अपने भक्तों की आर्थिक समस्याओं और दरिद्रता को नष्ट करती हैं और धन से घर भरती हैं। धन लक्ष्मी की कृपा से व्यक्ति को फिजूल खर्ची, कर्ज और सभी आर्थिक परेशानियों से छुटकारा मिलता है।
गज लक्ष्मी - हाथियों और वाहनों की देवी है। इनकी पूजा एक ऐसे व्यक्ति के लिए सबसे अच्छी है जो वाहन की इच्छा रखता है। वाहनलक्ष्मी की कृपा से वाहन सुख की प्राप्ति होती है और वाहनों का भी उचित उपयोग होता है।

आदि लक्ष्मी - अनंत समृद्धि की देवी आदि लक्ष्मी या महा लक्ष्मी देवी लक्ष्मी का एक प्राचीन अवतार है। वह ऋषि भृगु की पुत्री है। वह अनंत समृद्धि के धन का प्रतिनिधित्व करती है। आदि लक्ष्मी देवी की कभी न खत्म होने वाली रचना का प्रतीक है। इसलिए वह धन के निरंतर प्रवाह का प्रतिनिधित्व करती है।

विजय लक्ष्मी - विजय, दृढ़ता, साहस और आत्मविश्वास की देवी विजयलक्ष्मी या ऐश्वर्या लक्ष्मी के रूप में लक्ष्मी की पूजा करने से दुनिया में भक्तों को सम्मान, प्रसिद्धि मिलती है। प्रसिद्धि की यह देवी भक्त को ज्ञान और विनम्रता के गुणों से सम्मानित करती है और सांसारिक शत्रुता को समाप्त करती है।

धीर्या लक्ष्मी - साहस, धैर्य, रणनीति, योजना, निष्पक्षता की देवी है धीर्या लक्ष्मी। धीर्या लक्ष्मी की राशि में प्रगति होती है। चाहे व्यवसाय में हो या नौकरी में धीर्या लक्ष्मी की आवश्यकता है। वह शक्ति और साहस का परिचय देती है।

धान्य लक्ष्मी - अन्न, धान्य, पोषण और आरोग्य की देवी माँ लक्ष्मी घर में अन्नपूर्णा के रूप में रहती हैं और धन लक्ष्मी या स्थलाक्ष्मी की पूजा करने के बाद उनकी कृपा से घर में कभी कोई कमी नहीं रहती और घर हमेशा पैसों से भरा रहता है।

विद्या लक्ष्मी - शिक्षा और ज्ञान की देवी विद्या का अर्थ है ज्ञान और शिक्षा, न कि विश्वविद्यालय से केवल डिग्री या डिप्लोमा, बल्कि वास्तविक सर्वांगीण शिक्षा। इस प्रकार विद्या लक्ष्मी कला और विज्ञान के ज्ञान का दाता है।

संतान लक्ष्मी - संतान की देवी, विरासत, परिवार, मित्र, और शुभचिंतक संतान लक्ष्मी की पूजा एक नि: संतान दंपत्ति द्वारा की जाती है जिससे बच्चे का जन्म होता है। लक्ष्मी धन, सुख और समृद्धि के साथ बच्चे को आशीर्वाद देती है।


FAQ

माँ अष्टलक्ष्मी को कैसे प्रसन्न करूँ?

यदि आप धन की देवी लक्ष्मी को आकर्षित करना चाहतें है तो आपको निश्चित रूप से कुछ चीजें जानने की जरूरत है जो उन्हें खुश करती हैं। माँ के पुजन के समय अपने घर का प्रवेश बहुत सुन्दर सजाये। दीप एवं मोमबत्तियों से अपना घर रोशन करें। फूलों की सजावट एवं रंगोली भी माता लक्ष्मी को बहुत प्रिय होती है। इस दिन तुलसी पूजन भी अवश्य करना चाहिए।


हम धनतेरस पर अष्टलक्ष्मी की पूजा क्यों करते हैं?

धनतेरस के दिन अष्टलक्ष्मी का पूजन बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। देवी लक्ष्मी धन की देवी है साथ ही उनका अष्टलक्ष्मी स्वरुप भक्तों को समस्त प्रकार के सुखों का अनुभव प्रदान करता है। उनके भक्तों को जीवन भर सुख - समृद्धि एवं परिपूर्णता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।


मैं मां अष्टलक्ष्मी पूजा को ऑनलाइन कैसे बुक कर सकता हूं?

यह प्रक्रिया बहुत ही आसान है। अष्टलक्ष्मी पूजा ऑनलाइन बुक करने के लिए आपको वेबसाइट पर जाकर पूजा को बुक करना है साथ ही लॉगिन करने के बाद लिखित राशि का भुगतान करना होगा। बुक करने के बाद समय - समय पर हमारी टीम आपसे जुड़कर संकल्प मुहूर्त एवं पूजन के विषय में आपको सूचित करेगी।


क्या अष्टलक्ष्मी मंदिर हैदराबाद में पूजा करना फायदेमंद है?

हैदराबाद का महालक्ष्मी मंदिर, माँ लक्ष्मी का सिद्ध मंदिर है। मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में मांगी हर मुराद जरूर पूरी होती है। इसलिए कहा जाता है यदि धन से जुड़ी कोई भी परेशानी हो तो इस मंदिर में पूजन जरूर करवाना चाहिए। इससे शुभ फल प्राप्त होते है।


क्या मैं माँ अष्टलक्ष्मी देवी की पूजा रोज कर सकता हूँ?

जी बिलकुल, माँ अष्टलक्ष्मी की पूजा वैसे तो विशेष तौर पर शुक्रवार के दिन पर किया जाता है। परन्तु प्रत्येक दिवस उनका पूजन किया जा सकता है। इससे घर में सुख - शांति बनी रहती है और किसी प्रकार की कोई बाधा का सामना भी नहीं करना पड़ता है।



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