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Adhik Mass Puja Laxmi Narayan Temple Delhi

सोई हुई किस्मत जगाने का समय - अधिक मास की एकादशी पर कराएं 10 महादान - लक्ष्मी नारायण मंदिर, दिल्ली : 27-सितम्बर-2020 (Adhik Maas Puja)

By: माई ज्योतिष विशेषज्ञ

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अधिक मास की एकादशी पर जरुरी है यह दान :- 
•    घी : सुख एवं सम्पन्नता के लिए 
•    कपूर : घर में शांति के लिए 
•    केसर : नकारात्मकता को दूर करने के लिए 
•    कच्चे चने : व्यापार या नौकरी में उन्नति के लिए 
•    गुड़ : धन आगमन के लिए 
•    तुवर दाल : वैवाहिक अड़चने दूर करने के लिए 
•    माल पुआ : निर्धनता के निवारण के लिए 
•    खीर : ग्रहों के बुरे प्रभावों को दूर करने के लिए 
•    दही : शारीरिक परेशानियों को दूर करने के लिए 
•    चावल : कार्य बाधाओं को दूर करने के लिए 

अधिक मास बहुत ही पवित्र माह माना जाता है। इस वर्ष यह 18 सितंबर से प्रारम्भ होकर अगले माह 16 अक्टूबर तक रहेंगे। इस वर्ष अधिक मास के दौरान 160 वर्षों बाद एक ख़ास योग का निर्माण हुआ है जो अब 2039 में निर्माण होगा। अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है क्योंकि इस माह के अधिपति भगवान विष्णु है। अधिक मास के दौरान पूजा पाठ और दान करना बहुत अच्छा माना जाता है। इससे 10 गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है। एकादशी के दिन दान करना बहुत पुण्य का काम है। कहा जाता है की जो कोई भी अधिक मास की एकादशी पर कुछ विशेष वस्तुओं का दान करता है , उसकी परेशानियां स्वयं भगवान विष्णु दूर करते है। उसकी हर इच्छा पूर्ण होती है साथ ही उसका घर अन्न एवं धन से सदैव भरा रहता है। 

दान के शुभ फल :

  • निर्धनता का निवारण होता है। 
  • गंभीर रोग एवं बीमारियां ठीक हो जाती है। 
  • ऋण एवं कर्जों से छुटकारा मिलता है। 
  • समस्याओं का समाधान एवं अद्भुत फल की प्राप्ति होती है। 
  • धन - धान्य की कोई कमी नहीं रहती। 

हमारी सेवाएं :
हमारे पंडित जी द्वारा पूर्ण विधि - विधान से एकादशी के दिन इन वस्तुओं का दान संपन्न किया जाएगा। साथ ही पूजन से पहले पंडित जी द्वारा फ़ोन पर संकल्प कराया जाएगा।

जानिये हमारे पंडित जी के बारे में

ऑनलाइन अधिक मास पूजा के लाभ

इस वर्ष, अधिक मास 18.9.2020 से 16.10 2020 तक रहेगा। अधिक मास प्रत्येक 32.5 महीनों में एक चंद्र वर्ष का तेरहवाँ महीना होता है। अधिक मास को मल मास या पुरुषोत्तम मास या मालिम्माच के नाम से भी जाना जाता है। मल मास व्रत लोगों के सभी पापों को दूर करने में सक्षम है। चंद्र वर्ष में 12 महीने होते हैं और सौर कैलेंडर के दिनों और मौसमों के साथ इसका मिलान करने के लिए ऋषियों और मुनियों द्वारा गणना की जाती है। हिंदू विद्या के अनुसार 12 महीनों में से प्रत्येक का प्रतिनिधित्व एक भगवान द्वारा किया गया था।

परन्तु अधिक मास को किसी ने नहीं चुना। अधिक मास ने भगवान विष्णु के सामने अपनी दुर्दशा प्रस्तुत की और शरण मांगी। भगवान विष्णु ने दया की और स्वयं को अधिक मास को देव मानकर इसे पुरुषोत्तम मास का नाम दिया। भगवान विष्णु ने यह भी कहा कि अन्य महीनों के दौरान अच्छे कर्म, जप, तपस्या आदि के माध्यम से योग्यता प्राप्त करना इस एक महीने के भीतर किए गए जप, तपस्या आदि के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। तब से इस महीने ने अन्य महीनों की तुलना में अधिक महत्व प्राप्त किया है।

इस अवधि के दौरान लोग कई धार्मिक अनुष्ठानों को करते हैं जैसे कि व्रत का पालन करना, धार्मिक शास्त्रों का पाठ करना, मंत्र जप, प्रार्थना करना, कई तरह के पूजा-पाठ और हवन करना। अलग-अलग समय (पूरे दिन, आधे दिन, साप्ताहिक, पखवाड़े, पूरे महीने आदि) के व्रत एक व्यक्ति की सहिष्णुता क्षमता के अनुसार किए जाते हैं। यह व्रत कई प्रकार के हो सकते हैं जैसे तरल पदार्थों से पूर्ण उपवास या बिना तरल पदार्थ, केवल फलों के साथ उपवास करना या एक समय के शाकाहारी भोजन के साथ उपवास करना। एक पवित्र पाठ की कथ श्रृंखला को धारण करके व्यक्ति इस पवित्र महीने का पालन करते हैं। यह अनुष्ठान इस जीवन और पिछले जीवन के दौरान जमा हुए सभी पापों को दूर कर देते हैं।

अधिक मास में संपन्न किए जाने वाले अनुष्ठान यदि किसी विशेष लक्ष्मी नारायण मंदिर में हो तो इसका बहुत अधिक फल प्राप्त होता है। भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को समस्त सुखों की प्राप्ति होती है। और यदि आप किसी कारणवश यह पूजा मंदिर में संपन्न नहीं करवा सकतें तो आप ऑनलाइन अधिक मास पूजा भी संपन्न करवा सकतें है। ऑनलाइन पूजा के माध्यम से बिना की किसी परेशानी के पूजा संपन्न हो जाएगी और इसका पूर्ण फल भी प्राप्त होगा।


Benefits of Online Adhik Mass Puja

Purushottam Maas or Adhik Maas is an extra month in the Hindu calendar which, helps in keeping lunar and solar year aligned. Purushottam Maas is a month which is dedicated to Lord Vishnu.

At the time of Adhik Maas, people execute various religious rituals to impress lord Vishnu by keeping fast, chanting religious scriptures, mantras, prayers and by carrying out various types of puja and havan. People do Vratas of various time durations. It is believed that the people performing good deeds in this month, can conquer their senses.

The affects of movement of moon and sun, can be observed in the atmosphere during this period of eclipse. To avoid adverse effects of these movements on health, it has been advised to follow different vowed religious observances and virtuous acts. According to Hindu mythology ,doing vratas and fasts leads to fulfillment of wishes so one should keep fast. Different types of vratas doen by people are ‘avachit Bhojan’, ‘Nakta-bhojan’ or have meal only once a day for Shri. Purushottam.

During this month, adhik maas puja of Shri. Purushottam Krushna is carried out. People also chant his name; so that they can be in constant communion with Him.

People are advised to go for adhik maas puja online in order to maximize the profit of Pooja. One can easily book adhik maas puja online on any website. Online booking provides experts, for all the rituals.

In Hindu calendars, eleventh day of the Lunar fortnight is known as Ekadashi. In case of Hindu leap year, two more Ekadashis get added to the list of 24 ekadashi in a year. The ongoing Hindu year, year 2020 as per the Lunar calendar has the Adhik Maas, and therefore, there are 26 Ekadashi this time. The Adhik maas Ekadashi are considered ideal for worshipping Lord Vishnu, the one who wants to sustain life on this planet. The devotees keep a day-long fast and break it only on the next day, i.e., Dwadashi Tithi.

Adhik maas Ekadashi Tithi begins at 6:59 PM on September 26 and ends at 7:46 PM on September 27. One should indulge in good practices and do Adhik maas puja and offer food and money to the needy. In this way people can seek blessings of Lord purushottam.


FAQ

अधिक मास का क्या अर्थ है?

अधिक मास का अर्थ है हिन्दू वार्षिक कैलेंडर में 12 महीने के अलावा एक और माह का होना। यह तब होता है जब जब एक चंद्र महीना समाप्त होने से पहले  ही सूर्य एक नई राशि में चला जाता है। जिसके कारण चंद्र महीने के बचें हुए दिवस प्रत्येक तीन वर्षों में अधिक मास के रूप में जानें जातें है। सामान्य रूप से हिन्दू कैलेंडर में 12 महीने होतें है परन्तु इस वर्ष में वह 13 महीने हो जाते है।


2020 में अधिक मास कब है?

वर्ष 2020 में अधिक मास 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक रहेगा। यह 30 दिन का समय बहुत ही पावन माना जाता है। पूजा - पाठ एवं दान दक्षिणा की दृष्टि से इससे शुभ कोई और माह नहीं होता है। यह माह विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष दो आश्विन माह होंगे। जिसमें से एक अधिक मास के रूप में जाना जाएगा।


अधिक मास की गणना कैसे की जाती है?

अधिक मास की गणना का विश्लेषण चंद्र वर्ष के अनुसार जाना जाता है। प्रत्येक चंद्र वर्ष 32 महीने 16 दिन और 8 घड़ी का होता है। एक घड़ी 24 मिनट की होती है जो 60 घड़ी मिलकर 24 घंटे की अवधि का निर्माण करते है। इस माह में शुभ कार्य वर्जित होतें है। परन्तु देवताओं का पूजन इस माह में शुभफलदायी होता है। ख़ासकर यदि इस माह भगवान विष्णु का पूजन किया जाएं तो समस्त विपत्तियों का नाश होता है।


अधिक मास कितनी बार आता है और क्यों?

अधिक मास की अन्य महीनों के बीच की स्थिति परिवर्तनशील है। यह प्रत्येक 32.5 महीनों के बाद फिर से होता है। ऐसा इसलिए होता है ताकि सूर्य एवं चंद्र वर्ष का समय सामान्य हो जाएं। इन 32.5 महीनों में इन दोनों वर्षों में जो अंतर उत्पन्न होते है , वह अधिकमास के बाद समाप्त हो जातें है।


मलमास / पुरुषोत्तम मास क्या है?

मलमास और पुरुषोत्तम मास, अधिक मास के ही अन्य नाम है। इस माह में भगवान विष्णु की पूजा बहुत प्रभावशाली मानी जाती है। भगवान पुरुषोत्तम, श्री विष्णु का ही स्वरुप है इसलिए इस माह को पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इस माह को लेकर एक और मान्यता है की इस दौरान किसी भी शुभ कार्य का प्रारम्भ नहीं करना चाहिए क्यूंकि यह माह मलिच्छ होता है। जिसके कारण ही इसे मलमास कहा जाता है।


What does Adhik Maas mean?

Hindu calendar is a lunar calendar that is, it follows the cycles of moon. Solar months consists of 30-31 days but lunar months consists of only 29.5 days. Thus a lunar year consists of 354 days unlike solar year which has 365 days. So every year there is difference of 11 days and after 2-3 years this difference becomes of about 30-31 days. Thus making a Purushottam Maas or Adhik Maas. In Hindu calendar adhik calendar is an extra month for the alignment of lunar and solar calendars. Purushottam is an epithet of Vishnu, and thus the whole month is dedicated to him.


When is Adhik Maas in 2020?

In 2020, Adhik Ashwin, one extra month after Ashwin will be from 18 September to 16 October 2020. Hindus follow the Lunar calendar for ascertaining the dates of the festivals and mahurat of other auspicious events. The solar calendar is used for determining the position of the Sun and the major occurrences related to it.


How is the Adjika Mass calculated?

Purushottam Maas is unique to Hindu calendar which is based on cycles of moon. On an average Adhik Maas comes in every 2 years and 8.5 months. This value can be calculated by dividing the duration of month which is, 29.5 days by 10.9. Lunar year is 10.9 days smaller so by dividing 29.53 by 10.9 we get 2 years and 8.5 months. And thus a difference of one whole month arises. This additional month is  the Adhik Maas.


How often does Adhik Mass come and why?

The sun moves through one zodiac sign in every month; but during ‘ Adhik Maas ’ it remains stationary and therefore, there is no ‘Surya-sankrant’, movement of Sun in ‘ Adhik Maas ’. It affects the movement of both moon and sun, changes are also observed in atmosphere like during period of eclipse. This Adhik Maas occurs in every 2.8 years. We can easily calculate the frequency of this month.


What is Malmas/Purushottam Maas?

There are usually twelve months in a year, but an additional month is added once in about two-three years to align the lunar and the solar calendars and it known as Malmas / Purushottam Maas / Adhik Maas in common language.



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